जिला कलक्टर व प्रभारी सचिव।
श्रीगंगानगर के जिला कलक्टर शिवप्रसाद नकाते।

श्रीगंगानगर। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर इन दिनों एक बाबू की कलक्टरगिरी चलने की चर्चा कर्मचारियों में ही खूब हैं। जिस तरह से अनुभवी बाबुओं को वे ठिकाने लगा रहे हैं, उससे लगता है कि वे बड़ी रणनीति बनाने के लिए प्रयासरत हैं।

जिलाधीश कार्यालय के ही एक कर्मचारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं, श्रीगंगानगर में राज्य सरकार ने आईएएस शिवप्रसाद मदन नकाते को नियुक्त किया था, किंतु कलक्टर कार्यालय में जिस तरह से तबादलों का दौर चल रहा है, उससे साफ हुआ कि पर्दे के पीछे रहकर कोई अन्य व्यक्ति उनको गलत फीडबैक दे रहा है, जिससे कर्मचारियों को कलक्टर कार्यालय से बाहर भेजा जा रहा है। उन कर्मचारियों को भी जिनका रिटायरमेंट दो-तीन माह बाद ही है।

उस कर्मचारी का कहना था, कर्मचारियों के स्थानांतरण पर कलक्टर का अधिकार सुरक्षित है। उसको कोई भी चैलेंज नहीं कर रहा। न ही करना चाहता है किंतु जब निर्दोष कर्मचारियों को एक कर्मचारी अपने खास उद्देश्य के लिए प्रताड़ित करे तो उससे यह सवाल जन्म लेता है कि आखिर कलक्ट्रेट में चल क्या रहा है।

पिछले कुछ समय के दौरान तबादले हुए, जिसको लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस समाचार के बारे में जानकारी देने वाले कर्मचारी का कहना था, न्याय शाखा में कार्यरत सोहनसिंह को बिना किसी शिकायत के सामान्य शाखा में स्थानांतरण के आदेश जारी हो गये। दो दिन ही बीते थे कि कलक्टर ने अपना ही आदेश निरस्त कर दिया और सोहनसिंह को न्याय शाखा में ही कार्य करने के आदेश जारी हो गए। वहीं राजस्व शाखा में कार्यरत अनुभवी रामकुमार को न्याय शाखा में भेजा जा रहा था, को सामान्य शाखा में भेज दिया गया।

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वहीं डाक शाखा में कार्यरत राजीव भाटिया का अचानक ही तबादला अनूपगढ़ कर दिया गया। उनका तबादला क्यों किया गया, यह आज तक किसी को समझ नहीं आया। प्रशासन ने भी उनके तबादले के कारणों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की।

तबादलों के जरिये प्रताड़ित करने का खेल यहीं समाप्त नहीं हुआ न्याय शाखा में कार्यरत राकेश सोनी को ट्रेजरी भेज दिया गया। क्यों भेजा गया। यह भी पता नहीं। वहीं प्रशासनिक अधिकारी पर पदोन्नत हो चुके लक्ष्मण सांखला को भी ट्रेजरी भेज दिया गया। लक्ष्मण सांखला हृदय और हाइपरटेंशन के मरीज हैं। उनके रिटायरमेंट को कुछ माह ही बचे हैं और ट्रेजरी में जब तक वह वहां का कार्य को समझ पायेंगे, तब तक सेवानिवृत्ति की तारीख आ जायेगी।

अब एक नया और अनोखा मामला सामने आया है। हाल ही में जिला कलक्टर के आदेशों वाली एक और तबादला सूची आयी। इस सूची में राकेश सोनी को वापिस न्याय शाखा के लिए आदेश जारी हो गये। एक माह पहले उनको किन कारणों से हटाया गया और अब किस आधार पर उनकी वापसी हुई है, यह सवाल कोई भी कलक्टर से नहीं कर सकता। अगर करेगा भी तो कलक्टर जवाब देने को तैयार नहीं होंगे।

इस सूची में ही विकास शाखा के प्रभारी अशोक सोलंकी का तबादला श्रीकरणपुर कर दिया गया। सोलंकी का मार्च में रिटायरमेंट हैं। अब वे तीन-चार माह श्रीकरणपुर में रहकर वहां के मामलों की जब तक जानकारी लेंगे, तब तक सरकार उनकी सेवानिवृत्ति का बिगुल बजा चुकी होगी। सोलंकी के पास सालों से विकास शाखा का कार्यभार था और वे मेडिकल कॉलेज सहित अन्य सभी मामलों को अच्छी तरह रटे हुए थे और हर सवाल का तुरंत जवाब भी दे रहे थे। 60 साल का व्यक्ति रोजाना घंटों बस का इंतजार करेगा और फिर सफर करता हुआ अपडाउन किया करेगा वो भी जब सर्दी दस्तक दे चुकी है।

दूसरी ओर संजीव कुमार, जो अपनी विधवा मां का श्रीगंगानगर में एकमात्र सहारा हैं। एडीएम सिटी कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक के रूप् में कार्य कर रहे थे, उनको मुकलावा स्थानांतरित कर दिया गया। जहां के लिए न तो सीधी बस सेवा है और न ही वहां रहने के लिए सरकारी क्वार्टर हैं, ताकि वे अपनी मां और परिवार को तो वहां रख सकें।

उनके स्थान पर सहायक प्रशासनिक अधिकारी अशोक कुमार नागपाल को एडीएम सिटी का पीए लगा दिया गया। उनकी रिटायरमेंट को भी कुछ माह बचे हैं। आज तक उन्होंने एडीएम कार्यालय में कार्य नहीं किया था। अब उनको लगाया गया है तो वृद्धावस्था में गुंडा एक्ट, आईपीसी सहित अन्य एक्ट का अध्ययन कर रहे हैं, जबकि उनको पता है जब तक वे इन एक्ट्स में प्रशिक्षित होंगे तब तक सरकारी सेवा से विदाई का समय आ जायेगा। फिर भी एक्ट्स को पढ़ रहे हैं। एक हकीकत यह भी है कि सहायक प्रशासनिक अधिकारी का पद एडीएम सिटी कार्यालय में है ही नहीं।

इस कर्मचारी का कहना था,  कलक्टर को जो भी फीडबैक दे रहा है, उसने उन तक गलत जानकारी पहुंचाई। एक हकीकत यह भी है कि स्थापना शाखा में कार्यालय अधीक्षक की अधिकृत कुर्सी पर गैर सरकारी कर्मचारी पूरे दिन मजमा लगाये रहते हैं। कुछ ऐसे लोग भी वहां मजमा लगाये होते हैं, जिनकी बॉडी लैंग्वेज बताती है कि उनका उद्देश्य समाज की मुख्यधारा से नहीं जुड़ा है। यह कार्यालय अधीक्षक का कक्ष है और यहां महिला कर्मचारियों को सरकारी कार्य से आना पड़ता है।

वरिष्ठ कर्मचारियों को जिस तरह से जिला मुख्यालय से हटाकर अन्य स्थानों पर भेजा जा रहा है और रिटायरमेंट के नजदीक कर्मचारी जब तक अपने पदस्थापन पर अनुभव प्राप्त करेंगे, तब तक उनकी विदाई हो चुकी होगी। तब नये कर्मचारियों की नियुक्ति की प्रकिया आरंभ होगी।