शी जिनपिंग और नरेन्द्र मोदी
भारत और चीन के बीच प्रतिनिधिमंडल वार्ता का प्रतिनिधित्व करते श्री मोदी और श्री जिनपिंग।

 प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शिखर वार्ता में बनी सहमति

96 बिलियन डॉलर का व्यापार है दोनों देशों के बीच

53 बिलियन डॉलर का निर्यात करता है चीन

भारत कर रहा है आईटी और औषधि के लिए चाइना में बाजार के द्वार खोलने की मांग

चैन्नई। भारत और चीन आपसी व्यापार में भारत के घाटे को कम करने पर सहमत हो गए हैं। चीन भारतीय उद्योग जगत को व्यापार के लिए  ज्यादा सहूलियत देने पर भी तैयार है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच दूसरे अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में यह तय किया गया। भारत औषधि और आईटी सैक्टर में निर्यात के लिए चीन से ज्यादा बाजार हिस्सा देने की मांग कर  रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विजय गोखले ने शिखर सम्मेलन के बाद पत्रकारों को बताया कि दोनों देशों के बीच वर्ष 2018 में 96 बिलियन डॉलर का व्यापार है और 18.84 बिलियन डॉलर का निर्यात भारत ने चीन को किया। भारत को 57.86 अरब डॉलर का घाटा हुआ।  इस व्यापार असंतुलन को समाप्त करने के लिए चीन से भारतीय उद्योग के लिए अधिक सुविधाओं की मांग की गई। चीनी राष्ट्रपति श्री जिनपिंग ने इस बात पर सहमति व्यक्त की है कि जैनरिक दवाओं तथा आईटी सैक्टर का चीन स्वागत करेगा।

श्री गोखले ने साफ किया कि शिखर सम्मेलन के दौरान कश्मीर पर कोई चर्चा नहीं हुई। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को आश्वस्त किया है कि चीन ईमानदारी से यह विचार करेगा कि किस तरह से व्यापार असंतुलन को कम किया जाए।

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उल्लेखनीय है कि चाइना अभी तक भारतीय उत्पादों के लिए अपने बाजार को उपलब्ध करवाने से बचता रहा है।

चीन की महत्वपूर्ण सिल्क रोड को लेकर दोनों पक्षों के बीच में कोई वार्ता नहीं हुई। भारत इस योजना का यह कहकर विरोध करता है कि चाइना पाकिस्तान में गिलगित में सिल्क रोड निर्माण कर रहा है, जो भारत का हिस्सा है और वर्तमान में पाकिस्तान ने कब्जा किया हुआ है।

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चीन और भारत के बीच में सीमा विवाद को हल करने के लिए भी चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच 3500 किमी. लम्बा बॉर्डर है। इस सीमा के विवाद के कारण दोनों देश 1962 में युद्ध भी लड़ चुके हैं। भारत और चीन व्यापार असंतुलन को समाप्त करने के लिए एक उच्च स्तरीय दल बनाने के लिए सहमत हुए हैं। इसमें भारत का नेतृत्व वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी, जबकि चीन की अगुवाई वहां के उपप्रधानमंत्री करेंगे।