सादुलशहर में कोरोना पॉजिटिव
कोरोना पॉजिटिव महिला के घर के नजदीक पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी।

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कोविड-19 के खिलाफ किस तरह से लापरवाही बरत रहे हैं, इसका प्रमाण एक बार फिर से मिला है। सीनियर सिटीजन की श्रेणी में आने वाली एक महिला की ट्रैवल हिस्ट्री थी, वह घर लौटने के बाद से ही स्वस्थ नहीं थी। इसके बावजूद इस महिला को संस्थागत क्वारेंटाइन नहीं किया गया। वह निजी अस्पतालों के चक्कर उस समय काट रही थी जबकि परिवार के लोगों ने स्वयं इस महिला की सैम्पलिंग करवायी थी। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद महिला के स्वास्थ्य की निगरानी ही नहीं की गयी। जबकि ट्रैवल हिस्ट्री वालों को क्वारेंटाइन किये जाने के राज्य सरकार के स्पष्ट आदेश हैं।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सादुलशहर के वार्ड नं. 10 में एक महिला का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया है। वरिष्ठ नागरिक की कैटगिरी में शामिल महिला 29 जून को बीकानेर से आयीं थीं। कोरोना के स्पष्ट लक्षण तो नहीं थी किंतु महिला की तबीयत उस दिन से नासाज थी। उनको सरकारी अस्पताल ले जाया गया, वहां उनकी 2 जुलाई को कोरोना जांच की गयी। 4 जुलाई को रिपोर्ट आयी, जिसमें महिला को निगेटिव बताया गया।

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महिला के परिजन उनको सादुलशहर के ही एक निजी अस्पताल में ले गये, जहां उनको भर्ती कर लिया गया। वहां तीन दिन तक भर्ती रखने के बावजूद महिला के स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ तो उनको श्रीगंगानगर के एक निजी अस्पताल में लाया गया। सूत्रों का कहना है कि महिला को मेदांता अस्पताल में ले जाया गया था, जहां से उनको जिला अस्पताल भेज दिया गया।

कल बुधवार को महिला का दुबारा सैम्पल लिया गया और आज जब उसकी रिपोर्ट आयी तो चिकित्सा अधिकारियों के पैरों तले जमीन निकल गयी। महिला कोरोना पॉजिटिव थी।

परिवारजनों ने महिला के आते ही स्वास्थ्य विभाग में उनकी जांच करवायी थी। रिपोर्ट भले ही निगेटिव आयी थी किंतु उनकी ट्रैवल हिस्ट्री थी, उनको संस्थागत क्वारेंटाइन किया जाना चाहिये था, जो नहीं किया गया।

इस परिवार की सादुलशहर में ज्वैलरी का बड़ा कारोबार है। इस परिवार के सम्पर्क में आने वाले लोगों की सूची बनाने और उनके सैम्पल लेने का कार्य आरंभ किया जा रहा है।

रात करीबन 8 बजे रिपोर्ट आने के बाद सादुलशहर से स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी घर के आसपास कंटेनमेंट जोन बनाने के लिए पहुंच गये। अब वहां पुलिस पहरा लगा दिया गया है।

इस महिला की रिपोर्ट आते ही चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के मोबाइल स्विच ऑफ हो गए। आरसीएचओ डॉ. एचएस बराड़, जो कथित रूप से कोविड-19 की व्यवस्थाओं के प्रभारी हैं, से बात की गयी तो उन्होंने स्पष्ट जानकारी देने से ही इन्कार कर दिया। वे गोलमोल जवाब दे रहे थे। ध्यान रहे कि पूर्व में श्रीगंगानगर में सीएमएचओ रहे डॉ. बराड़ पदोन्नत होकर बीकानेर में संयुक्त निदेशक भी रह चुके हैं।

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वहीं पदमपुर में तीन और कोरोना रोगी सामने आये हैं। इनमें दो वार्ड नं. 13 से ही हैं। इनमें दो बालक भी शामिल हैं, जिनमें एक की आयु 11 साल और दूसरे की आयु 16 साल है। वहीं तीसरा रोगी एक निजी लैब में कार्यरत है। वह हिसार से लौटे परिवार का रिश्तेदार है जबकि एक बालक पूर्व में पॉजिटिव आये बालक का गहरा मित्र है। उसको भी बुखार की शिकायत हो रही थी, जिस पर उसकी जांच करवायी गयी थी।

हिसार से ही विवाह समारोह में लौटे पीलीबंगा में 22 रोगी सामने आ चुके थे। अब नोहर में भी इसी समारोह से लिंक रखने वाले 3 रोगी सामने आये हैं। सिलवाना खुर्द का भी एक व्यक्ति कोरोना पॉजिटव आया है। उसका लिंक भी इसी शादी के कार्यक्रम से है। हिसार में 17 लोग कोरोना पॉजिटिव पाये गये थे।