कोरोना वायरस लाइव : विश्व में घरेलू हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका

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नरेन्द्र मोदी और म्यांमार की राष्ट्रीय नेता आंग सू की
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और म्यांमार की राष्ट्रीय नेता आंग सू की, के साथ।

नई दिल्ली। कोरोना वायरस से बचाव के लिए लॉकडाउन का आज चौथा दिन है। देश भर में लोग घरों में कैद हैं। डब्ल्यूएचओ मान रहा है कि संक्रमण से प्रभावित लोगों की संख्या में कमी आ रही है। जो बचाव के लिए अब तक प्रयास किये गये हैं, वह कामयाब रहे हैं। दूसरी ओर हजारों ऐसे लोग भी हैं, जिनको होम क्वारंटीन किया गया है। इनमें संक्रमण के लक्षण थे अथवा यह लोग विदेश भ्रमण कर लोटे थे। कोरोना वायरस के कारण विश्व के 50 से अधिक देशों में औपचरिक रूप से लॉकडाउन है। इस कारण विश्व की 8 में से 3 अरब से ज्यादा आबादी घरों में कैद है। विश्व जब घरों में कैद है तो सकारात्मक और नकारात्मक समाचार भी आ रहे हैं।

 

कोरोना वायरस के कारण अनेक तरह की मुश्किलात से भरी खबरें भी आ रही हैं। दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र से हजारों लोग पैदल ही उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए रवाना हो गये हैं। इनको तीन दिन से भोजन नहीं मिला, जबकि दिल्ली ओर अन्य राज्य सरकारें दावा कर रही हैं कि बेरोजगार हुए दिहाड़ीदार मजदूरों को भोजन उपलब्ध करवाने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं और उनको भोजन भी दिया जा रहा है किंतु यह सब बातें कागजी निकलीं।

बिहार और उत्तरप्रदेश से दिल्ली व एनसीआर में आकर दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोगों को जब काम बंद हुआ तो भूखो मरने की नोबत आ गयी। इस कारण तीन दिन तक भूखे रहने के बाद यह लोग वहां से पैदल ही अपने घरों को निकल गये हैं। अनेक लोगों का गांव कई सौ किमी दूर है, किंतु वे इसकी परवाह नहीं कर रहे हैं। हजारों लोग के जब दिल्ली-उत्तर प्रदेश मार्गों पर देखा गया तो इसके बाद राज्य सरकारों की नींद टूटी। केजरीवाल कुछ समय बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए आये और बताया कि अभी तक 20 हजार लोगों को ही भोजन दिया जा रहा था। अब 2 लाख लोगों के लिए व्यवस्था की गयी है। दूसरी ओर उत्तरप्रदेश सरकार ने हरियाणा, उत्तराखण्ड राज्यों से वार्ता की और मजदूरों को भोजन उपलब्ध करवाने के लिए कहा है।

दक्षिण एशिया के देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल के बारे में भी जो समाचार आ रहा है, वह व्याकुल कर देने वाला है। श्रीलंका दक्षिण एशिया में काफी हद तक अपने देशवासियों को सुरक्षित रख पाया है। 106 उसके द्वारा रजिस्टर्ड किये गये हैं, जिसमें किसी भी व्यक्ति की मृत्यु कोरोना वायरस रोग से नहीं होना बताया गया है। पाकिस्तान में हालात पकड़ से बाहर जा रहे हैं। वहां 1408 लोग रोगी के रूप में पंजीकृत हैं और 11 लोगों की मौत की जानकारी दी जा रही है। बांग्लादेश में 48 मरीज हैं और पांच के डैथ केस रजिस्टर्ड हैं। भुटान में तीन और नेपाल में मात्र 4 रोगी ही अभी तक कोरोना वायरस से पीडित पाये गये हैं। मालद्वीव ऐसा देश हैं जहां 14 केस पंजीकृत किये गये हैं। दक्षिण एशियाई देशों में इस रोग से लड़ने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है किंतु इसके उपरांत भी यह देश अभी तक कोरोना वायरस को देश में महामारी फैलने से रोके हुए हैं, जैसे अमेरिका और यूरोप के देशों में हुआ है।

 

दूसरी ओर यूरोप में लॉकडाउन के बाद लोग घरों में कैद हैं और इससे घरेलू हिंसा की खबरों में खासी बढ़ोतरी हुई है। विश्व के अनेक समाचार एजेंसी ने इस बात की आशंका जतायी है कि लॉक डाउन के उपरांत विश्व भर में घरेलू हिंसा के मामलों में कई गुणा बढ़ोतरी हुई है। भारत में भी सोशल मीडिया पर पति-पत्नी के बीच चल रही घरेलू हिंसा से संबंधित व्यंग्यात्मक वीडियो भी प्रसारित हो रहे हैं।

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भारत में कोरोना वायरस के कारण करीबन 900 मामले पंजीकृत हो चुके हैं। ऐसे लोगों के लिए चिकित्सा विभाग के अधिकारी जुटे हुए हैं। शनिवार देर रात तक 19 लोगों की मौत की पुष्टि केन्द्र सरकार कर चुकी थी। केन्द्र सरकार ने तीस हजार अतिरिक्त वेंटीलेटर खरीदने के लिए मंजूरी प्रदान कर दी है। दूसरी ओर नव उदय केन्द्रीय विद्यालयों को भी अब कोरोना क्वांरटीन सेंटर में बदला जा रहा है। आरएसएस ने अपने मुख्यालय को भी एमरजेंसी अस्पताल के रूप में बदल दिया है। अनेक होटल और धर्मशालाओं को भी अधिग्रहण कर वहां अतिरिक्त बैड लगाये जा रहे हैं। राजस्थान सरकार प्राइवेट अस्पताल का अधिग्रहण करने का अधिकार जिला कलक्टर्स को दे चुकी है। हालांकि अभी तक भारत में कोरोना वायरस के रोगियों की संख्या नियंत्रण में है जबकि डब्ल्यूएचओ कह रहा है कि भारत ने अपनी जनसंख्या के अनुपात में विश्व में सबसे कम लोगों की जांच की है।

 

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इस बीच सकारात्मक समाचार यह आयी है कि ओजोन परत में हुआ छेद अब बंद होने लगा है। क्लाइमेट चेंज के कारण आ रही समस्याओं के कारण विश्व चिंतित था और अब उनकी चिंतांए दूर होने लगी हैं। जबकि एक सच्चाई यह भी है कि लॉकडाउन के कारण पिछले तीन महीनों से विश्व के अधिकांश देशों में औद्योगिक उत्पादन न के बराबर है।

वहीं लॉकडाउन के कारण वन्य जीवों के शहरों की ओर भ्रमण के अनेक मामले सामने आने लगे हैं। पूर्व में स्पेन में जंगली जीवों के शहरों की सड़कों पर देखे जाने के वीडियो सामने आये थे तो अब भारत में भी ऐसा होने लगा है। ट्रैफिक का शोर शांत होने के उपरांत वन्य जीव जंगलों से बाहर आ रहे हैं। गुड़गांव में तो कल नील गाय को सड़क पर विचरण करते हुए देखा गया।