भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, फाइल फोटो

श्रीगंगानगर। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में राशन की दुकानों पर राशन समाप्त होने लगा है। होलसेल दुकानें बंद है। यहां तक कि पुरानी आबादी में तो अनेक दुकानों पर चीनी तक नहीं है। आटा चक्की और सरसों के तेल मिलों को भी बंद किया गया है। लॉकडाउन के दूसरे ही दिन ही स्थिति कालाबाजारी बढ़ने की ओर इशारा कर रही है।

कोरोना वायरस नामक महामारी से देश को बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया था, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति न केवल बनी रहेगी, बल्कि कालाबाजारी भी नहीं होने दी जायेगी।

लॉकडाउन के दूसरे दिन ही लोगों के होसले पस्त होने लगे हैं। सोशल मीडिया पर अनेक लोग बता रहे हैं कि उनके क्षेत्र में राशन की दुकानों पर राशन नहीं है अथवा दुकानें बंद हो गयी हैं अथवा निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूल की जा रही है।

इस तरह के दावों के बीच एक राशन विक्रेता, सुनील प्रोविजन स्टोर के संचालक ने यह भी बताया कि उसकी दुकान पर चीनी भी खत्म हो गयी है। बाजार में थोक विक्रेता की दुकान बंद है वह अन्य दुकानदार से लेकर आया तो उसको बाजार मूल्य से भी ज्यादा दर पर चीनी मिली है। अब वह दुकान पर चीनी को बेचेगा तो उसको ज्यादा मूल्य लेना होगा और उस समय ग्राहक उस पर आरोप लगायेगा कि वह कालाबाजारी कर रहा है।

थोक विक्रेताओं की अगर दुकान नहीं खुलेंगी तो आपूर्ति की चेन बाधित होगी। इस बात की जानकारी नोडल अधिकारी, डीएसओ को भी है किंतु इस गंभीर समस्या के प्रति उनका ध्यान नहीं गया, यह संभव नहीं है।

इसी तरह से आटा चक्की और सरसों से तेल बनाने वाले कारखाने भी बंद हो गये हैं। कुछ दाल मिल के भी बंद होने की जानकारी मिल रही है।

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लॉक डाउन के दूसरे दिन ही जिस तरह के हालात पैदा हो गये हैं, उससे लोगों के मन में चिंता व्याप्त हो गयी है, जबकि तालाबंदी 21 दिन की है।

दूसरी ओर सब्जी मंडी की दुकानों को भी बंद करवा दिया गया है। सोशल डिस्टेसिंग के फार्मूले को आधार बनाया गया है। रसद अधिकारी मोहल्ला स्तर पर एक निश्चित स्थान पर कम से कम एक दुकान/रेहड़ी का तो संचालन हो, इस तरह की व्यवस्था भी नहीं कर पाये हैं। लोगों को मोहल्ले में रेहड़ी वालों के आने का इंतजार करना पड़ता है। उस समय तक भोजन का समय भी निकल जाता है।

नवरात्रि उत्सव भी चल रहा है। माता दुर्गा के हजारों उपासक व्रत में फलाहार करते हैं किंतु उनको बाजार में फल तलाशने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही है। फल विक्रेता गलियों में नहीं आ रहे हैं। इस तरह की शिकायतें भी श्रीगंगानगर के बाशिंदों ने की हैं।

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इस संबंध में प्रवर्तन अधिकारी ने कहा, उनके विभाग की तरफ से राशन की कोई दुकान बंद नहीं करवायी गयी है और न ही समय पर कोई पाबंदी है।

सोशल मीडिया पर लाल मिर्च से लेकर चीनी और सरसों तेल के कालाबाजारी किये जाने के दावे भी किये जा रहे हैं। 20 लाख की आबादी वाले जिले में व्यवस्थाओं को बनाने पर भी ध्यान देना होगा। जो जिम्मेदार अधिकारी हैं उनकी ड्यूटी केवल विभिन्न एसोसिएशन से सहायता राशि लेना ही नहीं है मीडिल क्लास फैमिली के अधिकारों की रक्षा करना भी उनकी जिम्मेदारी है।

वहीं देर शाम को सरकारी प्रवक्ता ने प्रेस नोट जारी कर जानकारी दी, नागरिकों को  घर बैठे उचित मूल्य पर खाद्य सामग्री मिलती रहे, इसके लिए ऑनलाईन आर्डर व आपूर्ति करने का जिला कलक्टर शिव प्रसाद नकाते प्लेटफार्म तैयार करवा रहे हैं। इस प्लेटफार्म पर सप्लायर रजिस्टर्ड होंगे। इस व्यवस्था में खाद्य वस्तुओं की दरें भी दर्शायी जाएगी। ऑन लाईन आर्डर करने के बाद राशन की होम डिलीवरी दी जाएगी।

श्री नकाते ने बताया कि जिले में आटा मिल, दाल तथा सरसो ऑयल मिल संचालित है तथा इन मिलों के लिए राॅ-मेटेरियल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। 40 लाख क्विंटल गेहूॅ का स्टाॅक है तथा शुगर मिल में भी चीनी का पर्याप्त स्टाॅक है। किसी प्रकार से खाद्य सामग्री की कमी नही है। थोक व्यापारी व रिटेल व्यापारी अपनी-अपनी दरे प्रशासन को उपलब्ध करवा दी है।

कोई भी व्यापारी अधिक रेट नही वसूल सकेगा। जिले में दालों के लिए जिला कलक्टर श्री नकाते ने चूरू व झुंझुंनू जिला कलक्टर से बात कर कई गाडिया दाल की रवाना करवा दी है। किसी नागरिक को खाद्य सामग्री को लेकर परेशान होने की आवश्यकता नही है। जिला कलक्टर ने किराणा के थोक एवं रिटेल विक्रेताओं की बैठक लेकर सही दाम पर खाद्य वस्तुएं बेचने के निर्देश दिए हैं।

जिला कलक्टर ने निर्देश दिए कि कोई भी दुकानदार उचित मूल्य से अधिक खाद्य सामग्री बेचते पाए जाने पर कार्यवाही की जाएगी तथा आगामी 21 दिनों के लिए दुकान सील की दी जाएगी तथा आपदा राहत नियमों के तहत कार्यवही भी की जाएगी। किसी नगारिक को शिकायत हो तो जिला रसद अधिकारी या जिला नियंत्रण को सूचित कर सकते है।