राज्यपाल ने विधानसभा का सत्र बुलाने की अनुमति देने का सशर्त प्रस्ताव रखा

जयपुर, 27 जुलाई (वार्ता) राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने राज्य सरकार के सामने विधानसभा का सत्र बुलाने की अनुमति देने का सशर्त प्रस्ताव रखा है।

श्री मिश्र ने आज अपने बयान में स्पष्ट किया है कि राजभवन की यह मंशा नहीं है कि यह सत्र नहीं बुलाया जाये, लेकिन सरकार को तीन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण देकर राजभवन को प्रस्ताव भेजना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विश्वास मत हासिल करना चाहती है तो यह अल्प अवधि में सत्र बुलाये जाने का युक्तियुक्त आधार बन सकता है, लेकिन वर्तमान में परिस्थितियाँ असाधारण है, लिहाजा राज्य सरकार को तीन बिन्दुओं पर कार्यवाही किये जाने का परामर्श देते हुए पत्रावली पुनः भेजना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विधानसभा का सत्र 21 दिन का स्पष्ट नोटिस देकर बुलाया जाये, जिससे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के अन्तर्गत प्राप्त मौलिक अधिकारों की मूल भावना के अन्तर्गत सभी को समान अवसर की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

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दूसरा यदि किसी भी परिस्थिति में विश्वास मत हासिल करने की विधानसभा सत्र में कार्यवाही की जाती है और जबकि विधानसभाध्यक्ष ने खुद सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुज्ञा याचिका दायर की है, ऐसी स्थिति में विश्वास मत प्राप्त करने की सम्पूर्ण प्रक्रिया संसदीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव की उपस्थिति में की जाये। सम्पूर्ण कार्यवाही की वीडियों रिकॉर्डिंग करायी जावे तथा ऐसा विश्वास मत केवल हाँ या ना के बटन के माध्यम से ही किया जाये। यह भी सुनिश्चित किया जाये कि ऐसी स्थिति में विश्वास मत का सजीव प्रसारण किया जाय।

तीसरा श्री मिश्र ने कहा कि यह स्पष्ट किय जाये कि विधानसभा का सत्र आहूत किया जाता है तो विधानसभा के सत्र के दौरान सामाजिक दूरी का पालन किस प्रकार किया जाएगा। क्या कोई ऐसी व्यवस्था है जिसमें 200 माननीय विधायकगण और 1000 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को एकत्रित होने पर उनको संक्रमण का कोई खतरा नहीं हो और यदि उनमें से किसी को संक्रमण हुआ तो उसे अन्य में फैलने से कैसे रोका जायेगा।

श्री मिश्र ने कहा है कि राजस्थान विधानसभा में 200 विधायकगण और 1000 से अधिक अधिकारियों, कर्मचारियों के एक साथ सामाजिक दूरी की पालना करते हुए बैठने की व्यवस्था नहीं है जबकि संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए आपदा प्रबन्धन अधिनियम एवं भारत सरकार के दिशा निर्देशों की पालना किया जाना आवश्यक है।

श्री मिश्र ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 174 के अन्तर्गत उपरोक्त परामर्श देते हुए विधानसभा का सत्र आहूत किये जाने के लिये कार्यवाही किये जाने के निर्देश राज्य सरकार को दिये हैं।
इससे पहले उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 31 जुलाई से सत्राहूत करने का प्रस्ताव भेजा, जिसमें कहा गया है कि ‘राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 में मंत्रिमण्डल की सलाह मानने को बाध्य हैं एवं राज्यपाल स्वयं के विवेक से कोई निर्णय नहीं ले सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि लेकिन विशेष परिस्थितियों में राज्यपाल को विधानसभा का सत्र संविधान की भावना के अनुरूप आहूत करने का हक है।