गुटेरेस ने दी महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अफगानिस्तान के उप राष्ट्रपति अमरूल्लाह सालेह पर हुए हमले की निंदा की है।

महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजार्रिक ने बुधवार देर रात जारी बयान में कहा, “महासचिव काबुल में पहले उपराष्ट्रपति अमरूल्लाह सालेह के आधिकारिक काफिले पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हैं।”

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समाचार एजेंसी स्पूतनिक के अनुसार उन्होंने पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने कहा कि महासचिव ने देश में शांतिपूर्ण समझौता की आवश्यकता को दोहराया और इस महत्वपूर्ण प्रयास में अफगानिस्तान की जनता और सरकार का समर्थन करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की है।

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि उनका इस विस्फोट से कोई संबंध नहीं है।

उल्लेखनीय है कि काबुल में तैमनी स्क्वायर में बुधवार को श्री सालेह को निशाना बना कर किए गए विस्फोट में 10 लोगों की मौत हो गई थी और 10 अन्य घायल हो गए थे।

एक अन्य बयान में श्री गुटेरेस ने शैक्षणिक संस्थानों को हमलों से बचाने के अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर बुधवार को आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम में कहा, “ स्कूलों और विश्वविद्यालयों को सुरक्षित स्थान माना जाता है जहां बच्चे और युवा जाकर सीखते हैं और अपना मानसिक तथा बौद्धिक विकास करने के अलावा सशक्त भी होते हैं।”

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने सभी सदस्य देशों से शिक्षा के अधिकार पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए मौजूदा अंतररराष्ट्रीय समझौतों के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने की अपील की है। इसके अलावा स्कूलों और विश्वविद्यालयों का उपयोग सैन्य गतिविधियों और उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भी नहीं होना चाहिए।

श्री गुटेरेस ने शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा के लिए कई सदस्य देशों की ओर से उठाए गए कदमों का स्वागत भी किया। उन्होंने समाज के वंचित तबकों समेत सभी के लिए शिक्षा के समान अवसर की उपलब्धता पर बल देते हुए कहा, मैं संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों से आग्रह करता हूं कि सभी के लिए शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करें, विशेष रूप से समाज के वंचित तबकों तथा शरणार्थियों के लिए।”

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संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव का कहना था, “ कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी ने हमारे समाज में मौजूद कई कमजोर पहलुओं पर प्रकाश डाला है। इनमें से एक है, शिक्षा तक लोगों की असमान पहुंच। आने वाले दशक में सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी पीछे न रहे। उसके लिए, सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और छात्रों के पढ़ने एवं सीखने के लिए सुरक्षित स्थानों की आवश्यकता है। ”

सलमान बिन और मर्केल ने जी-20 चर्चा की

सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सऊद और जर्मन की चांसलर एंजेला मर्केल ने फोन पर जी-20 काम पर चर्चा की। सऊदी मीडिया ने यह रिपोर्ट दी है।

रिपोर्ट के अनुसार बातचीत के दौरान सऊदी किंग और जर्मनी की चांसलर ने कोरोना वायरस बीमारी के प्रकोप को लेकर जी-20 बैठकों की रूपरेखा के भीतर संयुक्त प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुश्री मर्केल ने जी-20 बैठकों की तैयारी और संचालन के लिए सऊदी अरब के प्रयासों की सराहना की।

इजरायल करेगा कोरोना वैक्सीन का परीक्षण

इजरायल करीब 100 स्वयंसेवकों पर कोरोना वायरस (कोविड-19) वैक्सीन का पहला परीक्षण करेगा।

मध्य इजरायल स्थित शेबा मेडिकल सेंटर ने गुरुवार को यह जानकारी दी। कोरोना वैक्सीन का परीक्षण अक्टूबर में शुरू होगा और इसके लिए शेबा अस्पताल और हेडासाह मेडिकल सेंटर का चयन किया गया है क्योंकि दोनों में चिकित्सकीय परीक्षण के लिए बड़े केंद्र स्थित हैं।

वैक्सीन को इजरायल के सरकारी इंस्टीट्यूट फॉर बॉयोलॉजिकल रिसर्च (आईआईबीआर) ने विकसित किया है। इसे एक अन्य वायरस को आधार बनाकर तैयार किया गया जो मनुष्यों के लिए हानिकारक नहीं है।

इस वायरस के एक घटक को कोरोना वायरस के एक घटक की ओर से प्रतिस्थापित किया गया है जो मानव कोशिकाओं के साथ जुड़ने के लिए जिम्मेदार है।

जून में आईआईबीआर ने हैम्स्टर्स पर वैक्सीन परीक्षणों में सफलता की घोषणा की थी। टीकाकृत हैम्स्टर्स के रक्त में कोरोना वायरस के अवशेष नहीं थे, फिर भी उन्होंने वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी भी विकसित की।

पहले चरण में वैक्सीन की सुरक्षा का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद स्वयंसेवक अपनी मांसपेशी, हाथ या कूल्हे के माध्यम से वैक्सीन की एक डोज प्राप्त करेंगे।यदि यह साबित हो जाता है कि टीके का कोई महत्वपूर्ण दुष्प्रभाव नहीं है, तो परीक्षण का विस्तार सैकड़ों स्वयंसेवकों के लिए किया जाएगा और फिर इसकी प्रभावशीलता का परीक्षण भी किया जाएगा।

हेडासाह के महानिदेशक जीव रोटस्टीन ने हिब्रू समाचार वेबसाइट यनेट को बताया कि अस्पताल कर्मचारी जटिल परीक्षणों के पहले चरण के लिए आवश्यक विशेष सुविधाओं के साथ पूरी तरह तैयार हैं।

तुर्की में पांच पत्रकारों को कैद

तुर्की की एक अदालत ने एक खुफिया सेवा से संबंधित गोपनीय जानकारी का खुलासा करने पर पांच पत्रकारों को कैद की सजा सुनाई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ओडा टीवी ब्राॅडकास्टर के पत्रकारों बारिस टेरकोग्लू, हुल्या किलिंस, एरेन एकिंसी, बारिस पेहलिवन तथा येनि यासम अखबार के फरहत सेलिक, आयदिन केसर और येनिकैग अखबार से एर्क एकरर और मूरत एगिरेल ने राष्ट्रीय खुफिया संगठन के कर्मचारियों के उपनाम प्रकाशित किए जो लीबिया में मारे गए हैं। इसी को लेकर इस्तांबुल के सरकारी अभियोजक के कार्यालय ने पत्रकारों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की।

सोज्सू अखबार की रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने बुधवार को टेरकोग्लू और एकिंसी को बरी कर दिया, पेहलिवन और किलिंस को तीन साल और नौ महीने की कैद की सजा सुनाई, साथ ही एगिरेल, सेलिक और केसर को चार साल और आठ महीने की कैद की सजा सुनायी।

पेहलिवन, किलिंस और एगिरेल को पैरोल पर रिहा कर दिया गया है, जबकि एकरर के मामले पर अदालत अलग से विचार करेगी।