विश्व से ज्यादा पाकिस्तानियों को संदेश देना चाहते थे इमरान खान

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इमरान खान
पाक पीएम इमरान खान।

न्यूयार्क। संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा के 74वें वार्षिक अधिवेशन को संबोधित करने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को बुलाया गया तो उनके पास अपने देश की आर्थिक हालात को सुधारने के लिए कोई एजेंडा नहीं था। 5 अगस्त 2019 के बाद से वे कश्मीर  को लेकर जो बयान दे रहे हैं। उसी तरह का बयान उन्होंने यूएन में दिया। उनका ध्यान पाकिस्तान में था, जहां हाउडी कार्यक्रम में मोदी के आक्रामक भाषण के बाद इमरान की जमकर आलोचना हो रही थी। उनके भाषण का सुनकर यही लगा कि वे विश्व को नही बल्कि पाकिस्तान की एक चुनावी सभा को संबोधित कर रहे हैं।

टैक्सास के ह्यूस्टन में 22 सितंबर 2019 को हाउडी मोदी कार्यक्रम में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान को आतंकवाद पर चेतावनी दी थी तो अमेरिकन राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने भाषण में भी इस्लामिक आतंकवाद का जिक्र कर दिया। उन्होंने कहा कि सीमा पार से भारत और अमेरिका दोनों ही प्रभावित हैं। श्री ट्रम्प अमेरिका में दक्षिण सीमा पर मैक्सिको से आने वाले शरणार्थियों का मुद्दा उठा रहे थे। इस्लामिक आतंकवाद का अमेरिकी राष्ट्रपति के जिक्र के बाद से ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की स्वेदश में मीडिया और अन्य स्तर पर आलोचना हो रही थी।

पाकिस्तान में आर्थिक हालात इस समय भयावह हैं। दूध-दही, चीनी आदि खाद्य वस्तुओं पर टैक्स को बेतहाशा बढ़ा दिया गया है जिससे पाकिस्तान में रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा कर पाना पाकिस्तानियों के लिए आसान कार्य नहीं रह गया है। महंगाई चरम सीमा पर पहुंच गयी है।

दो बिलियन लोगों की समस्याओं को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा में भूल गये और एक भी ऐसा आर्थिक एजेंडा पेश नहीं कर पाये जिससे लगता हो कि पाकिस्तान बदल रहा है। वहां निवेश किया जा सकता है। अब तक चीन ही पाकिस्तान में मुख्य निवेशकर्ता रहा है और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण चीन की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है।

प्रधानमंत्री इमरान खान अपने 50 मिनिट्स के संबोधन में एक बार भी ऐसे नये प्रावधान का उल्लेख नहीं कर पाये जिससे लगता हो कि वे पाकिस्तानियों की आर्थिक हालात को सुधारने के लिए विश्व को आकर्षित कर सकते हैं। उनके पास निवेशकों के लिए नया कुछ भी नहीं था। टैक्स दरों में कटौती, निवेशकों को सिंगल विंडो योजना, निवेशकों की सुरक्षा, उनके निवेश राशि की सुरक्षा जैसा कोई शब्द उन्होंने नहीं कहा।

उनके लिए हिटलर और मोदी को याद करना आवश्यक था। अपने देश की समस्याओं को भूलकर उन्होंने भारत की आंतरिक राजनीति को फोक्स किया। 2002 के गुजरात दंगों को जिक्र किया। गांधी के सिद्धांतों के विपरीत पाकिस्तान के निर्माण का समर्थन करने वाले इमरान को गांधी भी याद आये। आरएसएस को कट्‌टरवादी विचारधारा वाला संगठन बताया।

वहीं उन्होंने कश्मीर का जिक्र सबसे अधिक समय तक किया। उन्होंने कहा कि कश्मीरियों को बंधक बनाया हुआ है जबकि कश्मीर में सरकारी-निजी स्कूल, महाविद्यालय, बाजार पहले ही खुल चुके हैं। पीटीआई के नेता यह जनता को बताना भूल गये। वहां मानवाधिकार हनन का आरोप लगाया किंतु अपने देश में जबरन रोजाना हिन्दु परिवार की बेटियों का जबरन निकाह के मामले में उन्होंने एक शब्द तक नहीं कहा। एक ईसाई महिला को फांसी की सजा देने का मामला पूरे विश्व में चर्चा का विषय बना रहा।

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इस्लामिक आतंकवाद के शब्द का इस्तेमाल अमेरिकन राष्ट्रपति ने किया था। इस शब्द को भी उन्होंने अपनी स्पीच का मुख्य बिंदु बनाया। पाक प्रधानमंत्री का कहना था कि इस्लामिक आतंकवाद के शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है किंतु इस्लामिक देश इस पर कुछ नहीं बोल रहे हैं।

वहीं पाक पीएम ने यह भी स्वीकार किया कि सोवियत संघ रूस की सेना को अफगानिस्तान में पराजित करने और उसको वहां से भगाने के लिए पाकिस्तान ने ही आतंकवादियों को समर्थन और प्रशिक्षण दिया था। उस समय उनको जेहादी कहा जाता था। अफगानिस्तान में तालिबान को अपने समर्थन पर भी बयान दिया वहीं अफगान की सरकार को भी अपना मित्र बताया। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान अभी भी चाहता है कि अमेरिका तालिबान के साथ उसकी शर्तों के आधार पर वार्ता करे।

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जलवायु परिवर्तन पर भी उन्होंने अपनी सरकार के प्रयासों की जानकारी दी और कहा कि पाकिस्तान में पर्यावरण को बचाने के लिए कार्य किया जा रहा है। ग्लेशियर के पिघलने पर भी उन्होंने कहा 80 प्रतिशत पानी ग्लेशियर से ही मिलता है। भविष्य में क्या होगा, कहा नहीं जा सकता।

निर्धारित अवधि से काफी अधिक समय तक इमरान खान ने भाषण दिया। इस दौरान बार-बार उनको संकेत देने के लिए बेल बजाई गई किंतु वे भारत के खिलाफ लगातार जहर उगलते रहे।

उन्होंने भारत और दुनिया को भयभीत करने के लिए एक बार फिर से परमाणु युद्ध की धमकी दी। इमरान खान का कहना था कि भारत उससे कहीं अधिक विशाल देश है। युद्ध में पाकिस्तान हार भी सकता है। उस समय पाकिस्तान के पास सिर्फ परमाणु हथियार ही बचाव कर सकता है।

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