117 दिन बाद नए कलेवर में होगी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी

नयी दिल्ली, 05 जुलाई (वार्ता) वैश्विक महामारी बन चुके कोरोना वायरस के कारण बंद पड़े अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की 117 दिनों के लम्बे अंतराल के बाद इंग्लैंड के साउथम्पटन में नए कलेवर में वापसी होने जा रही है जब इंग्लैंड और वेस्ट इंडीज की टीमें आठ जुलाई से पहले टेस्ट में आमने-सामने होंगी।

तीन टेस्टों की सीरीज का पहला टेस्ट दर्शकों के बिना खाली स्टेडियम में खेला जाएगा। टेस्ट क्रिकेट में चौथी और आठवीं रैंकिंग की टीमों के बीच इस मुकाबले से क्रिकेट की वापसी की उम्मीद बंधेगी जो कोरोना वायरस के कारण मार्च के मध्य से ही बंद है।
आखिरी अंतर्राष्ट्रीय मैच ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच 13 मार्च को एकदिवसीय मुकाबला था जो सिडनी में दर्शकों के बिना खेला गया था। इंग्लैंड और वेस्ट इंडीज के बीच टेस्ट सीरीज भी दर्शकों के बिना खेली जायेगी और इसमें कोरोना वायरस के कारण लाये गए कुछ नए नियम लागू होंगे।

इंग्लैंड और वेस्ट इंडीज के खिलाड़ी 14 दिन का क्वारंटीन गुजार चुके हैं और अपनी-अपनी टीमों के बीच अभ्यास मैच भी खेल चुके हैं। साउथम्टन टेस्ट से क्रिकेट बिलकुल बदले अंदाज में शुरू होगा।

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इस टेस्ट में गेंदबाजों का सबसे बड़ा टेस्ट होगा क्योंकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने कोरोना के कारण गेंदबाजों के गेंद पर मुंह की लार के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि गेंदबाज अपनी पुरानी आदत पर कैसे काबू पाते हैं।
आईसीसी ने हालांकि शुरुआती तौर पर नियम के उल्लंघन पर कुछ ढील देने की पेशकश की है क्योंकि गेंदबाजों को इसकी आदत है। आईसीसी के नियम के तहत अगर कोई खिलाड़ी गेंद पर मुंह की लार का इस्तेमाल करता है तो उसे चेतावनी दी जाएगी।
अंपायर टीम को दो बार इस नियम का उल्लंघन करने पर चेतावनी देंगे जिसके बाद फिर ऐसा होने पर बल्लेबाजी कर रही टीम को पांच अतिरिक्त रन दिए जाएंगे। गेंद पर मुंह की लार का इस्तेमाल अनजाने में हुआ है या नहीं इसका फैसला भी अंपायर करेंगे तथा अगली गेंद डालने से पहले गेंद को संक्रमण मुक्त करने की जिम्मेदारी भी अंपायर की होगी।
इसके अलावा कोरोना के कारण टेस्ट क्रिकेट में सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी की अनुमति भी दे दी गयी है।आईसीसी के मौजूदा नियमों के अनुसार मैच में सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी की तभी अनुमति होती है जब किसी खिलाड़ी के सिर में चोट लग जाए और वह खेलने की स्थिति में ना रहे। लेकिन कोरोना सब्स्टीट्यूट की मांग की जा रही थी और आईसीसी ने टेस्ट मैच के दौरान किसी खिलाड़ी में कोरोना लक्षण दिखने पर कोरोना सब्स्टीट्यूट की इजाजत दे दी है। इंग्लैंड ने ही सबसे पहले यह मांग उठायी थी।
मैच के दौरान किसी भी खिलाड़ी में कोरोना के लक्षण दिखने पर मैच रेफरी सिर पर चोट लगने के मामले की तरह ही इस बाबत फैसला लेगा।


इस मैच में स्थानीय अम्पायरों का इस्तेमाल होगा। कोरोना वायरस के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा प्रतिबंधों के चलते आईसीसी ने सभी प्रारुपों में तटस्थ मैच अंपायर रखने के फैसले को अस्थायी तौर पर समाप्त कर दिया था जिससे अब पैनल के कम अनुभवी स्थानीय अम्पायरों को मैचों में लगाया जाएगा।
टीमों को प्रत्येक पारी में अतिरिक्त डीआरएस भी मिलेगा। कोरोना के कारण नई परिस्थितियों में आईसीसी ने यह फैसला किया है।
यह सीरीज आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा है लेकिन कोरोना के कारण टेस्ट चैंपियनशिप का पूरा कार्यक्रम गड़बड़ा गया है। इस दौरान कई सीरीज को स्थगित किया गया है। आठ मैच स्थगित किये जा चुके हैं जिनमें बंगलादेश शामिल है।
आठ जुलाई से क्रिकेट एक नए युग में प्रवेश करने जा रहा है और पहला टेस्ट भविष्य की क्रिकेट की दशा और दिशा तय करेगा।