राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और शी जिनपिंग
US president Donald j. Trump and China's xi jinping.

न्यूयार्क । इटली, ईरान, पौलेंड, ब्राजील जैसे देशों में राहत कार्य में जुटा चीन क्या इस समय सुपर पावर है? यह सवाल पूरी दुनिया में खड़ा हो रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प  कोरोना वायरस को चायनीज वायरस कहकर संबोधित करते हैं तो विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कोरोना का नाम वुहान वायरस रखा हुआ है। तीन माह की तालाबंदी से चीन को बड़ा आर्थिक झटका लगा है। व्यापार धंधे बंद रहे तो वहीं वन रोड वन बेल्ट के लिये किये गये निवेश और वैश्विक लोन के भुगतान की समस्या भी उसके सामने बड़ी चुनौती है।

चीन भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दावा करता हो कि कोरोना वायरस से उसके देश में मात्र 3 हजार लोगों की जान गयी है और स्वस्थ होने वाले रोगियों का स्ट्राइक रेट विश्व में सर्वाधिक लगभग 90 प्रतिशत है किंतु चीन के इस दावे पर न तो अमेरिका यकीन करता है और न ही विश्व की स्वायत्त संस्थाएं। इसका कारण यह भी कहा जा रहा है कि चीन में न तो स्वतंत्र मीडिया है और न ही वहां विपक्षी राजनीतिक दल हैं। नवंबर में कोरोना वायरस सामने आने के बावजूद चीन ने विश्व से इसकाे दिसंबर के अन्तिम दिनों तक दबाये रखा।

अमेरिका की कुछ एजेंसियां यह दावा कर रही हैं कि चीन में रजिस्टर्ड मोबाइल होल्डर में से 81 लाख लोग लापता हैं। अमेरिका का संदेश साफ है कि चीन ने दुनिया से कोरोना से मरने वालों की संख्या को छिपाया है। भारत, अमेरिका, यूके और अन्य लोकतांत्रिक देशों के लिए यह संभव नहीं है। इन देशों में मजबूत लोकतंत्र ही नहीं बल्कि मजबूत मीडिया भी है। मीडिया भी विपक्ष की भूमिका निभाने से पीछे नहीं हटता है। वहीं चीन में सभी मीडिया हाउस पर सरकारी ठप्पा है। न ही वहां चुनाव होते हैं।

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चीन के खिलाफ विश्व में यह भी धारणा है कि अनेक लोगों ने जब चीन में कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए किये जा रहे अमानवीय कार्यों का विरोध किया तो वहां से अनेक सोशल एक्टीविस्ट को रातों-रात गायब कर दिया गया।
चीन के खान-पान को लेकर जो रिपोर्ट आयी है, वह भी विश्व को हिला रही है। इस कारण चीन भले ही यूरोपीय और अन्य देशों में कोरोना से लड़ने के मानवीय सहायता भेजने की बात करता हो, किंतु सच यह है कि सुपर पावर का दर्जा उसका कोरोना वायरस ने छीन लिया है। तीन माह से अधिक समय तक वहां व्यापारिक गतिविधयां ठप रही हैं। इस कारण आईएमएफ से लिया गया उसका कर्जा उसकी परेशानी को बढ़ाने वाला है जबकि आने वाला समय विश्व में आर्थिक मंदी का संकेत भी दे रहा है। विश्व के अधिकांश देशों में औपचारिक अथवा अनौपचारिक रूप से लॉकडाउन है।

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विश्व में अपना सामान बेचकर अरबों डॉलर जुटाने की उसकी मंशा को भी झटका लगा है। अमेरिका के साथ जो उसका ट्रेड वॉर चल रहा है, उससे भी उसकी मुश्किलात में बढ़ोतरी होगी। छोटे और गरीब देशों को अपने कर्ज तले दबाकर वहां सैनिक अड्‌डे स्थापित करने में जुटे चीन की इस घिनौनी हरकत को भी काफी बड़ा झटका लगा है। वुहान से निकले कोरोना वायरस के बाद चीन पहुंचने वालों में पाकिस्तान के राष्ट्राध्यक्ष ही विदेशी मेहमान रहे हैं।