Narendra modi
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लाल किले से देश को संबोधित करते। फाइल चित्र

पटना 15 सितंबर   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन को गति देने के लिए ‘आत्मनिर्भर बिहार’ विशेषकर देश के छोटे शहरों को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक तैयार करना बहुत जरूरी है।

श्री मोदी ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से केंद्र की नमामि गंगे और अमरुत योजना से संबंधित बिहार में 543.28 करोड़ रुपये की सात परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद कहा कि शहरी गरीबों और शहर में रहने वाले मध्यम वर्ग के लोगों का जीवन आसान बनाने वाली इन नई सुविधाओं के लिए वह सभी को बधाई देते हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत मिशन को गति देने के लिए आत्मनिर्भर बिहार विशेषकर देश के छोटे शहरों को वर्तमान ही नहीं भविष्य की जरूरतों के मुताबिक तैयार करना बहुत जरूरी है। इसी सोच के साथ अमरुत मिशन के तहत बिहार के अनेक शहरों में जरूरी सुविधाओं के विकास के साथ-साथ ‘ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’के लिए बेहतर माहौल तैयार करने पर बल दिया जा रहा है।


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प्रधानमंत्री ने कहा कि शहरीकरण आज के दौर की सच्चई है। आज पूरे विश्व में शहरी क्षेत्रों की संख्या बढ़ रही है। भारत भी इस वैश्विक बदलाव का अपवाद नहीं है, लेकिन कई दशकों से हमारी मानसिकता बन गई और हमने मान लिया था कि शहरीकरण खुद में एक बड़ी समस्या और बड़ी बाधा है लेकिन उनका सोचना कुछ अलग है। यदि शहरीकरण समस्या लगती है तो उसमें अवसर भी उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने तो उस दौर में ही इस सच्चाई को समझ लिया था और वह शहरीकरण के बड़े समर्थक थे। उन्होंने शहरीकरण को समस्या नहीं माना। उन्होंने तो ऐसे शहरों की कल्पना की थी, जहां गरीब से गरीब व्यक्ति को भी अवसर मिले और जीवन को बेहतर करने के रास्ते खुले।


श्री मोदी ने कहा कि आज आवश्यक है कि हमारे शहरों में संभावनाएं हो, समृद्धि हो, सम्मान हो, सुरक्षा हो, सशक्त समाज हो और आधुनिक सुविधाएं भी हों, यानी शहर ऐसे हों जहां सभी को खासकर युवाओं को आगे बढ़ने के लिए नई और असीम संभावनाएं मिले। शहर ऐसे हों, जहां हर परिवार सुख-समृद्धि के साथ जीवन जी सके। शहर ऐसे हों, जहां गरीब, दलित, पिछड़े और महिलाओं सभी को सम्मानपूर्ण जीवन मिले। जहां सुरक्षा हो, कानून का राज हो, जहां समाज का हर वर्ग एक साथ मिलजुलकर रह सके और शहर ऐसे हों, जहां आधुनिक आधारभूत सुविधाएं हों। यही तो ईज ऑफ लिविंग है और यही उनका सपना भी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश में एक नया शहरीकरण दिख रहा है। जो शहर पहले देश के नक्शे पर एक तरह से थे या नहीं थे वह आज अपनी उपस्थिति दर्ज भी करा रहे हैं और महसूस भी करा रहे हैं। इन शहरों के युवाओं ने बड़े स्कूलों और कॉलेजों मे पढ़ाई नहीं की है और वे अमीर परिवारों से भी नहीं है, वह आज कमाल कर रहे हैं। सफलता के नए आयाम गढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले तक शहरीकरण का अर्थ होता था कुछ बड़े शहरों को चमक-दमक से भर दो, कुछ गिने चुने शहर या क्षेत्र में विकास कर दो लेकिन अब सोचने का यह तरीका बदल रहा है और बिहार के लोग भारत के इस नए शहरीकरण में अपना भरपूर योगदान दे रहे हैं।

श्री मोदी ने कहा कि अमरुत मिशन के तहत शहरों में पानी और सीवरेज के साथ ग्रीन जोन, पार्क, एलईडी स्ट्रीट लाइट जैसी व्यवस्थाओं का निार्मण किया जा रहा है। इस मिशन के तहत बिहार के शहरी क्षेत्र में लाखों लोगों को बेहतर सीवरेज प्रणाली से भी जोड़ा गया है। इसमें भी अधिकतर सुविधाएं ऐसी बस्तियों में विकसित की गई हैं, जहां गरीब से गरीब परिवार रहते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के भी सौ से अधिक नगर निकायों में साढे चार लाख एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई जा चुकी है। इससे छोटे शहरों की गलियों में रोशनी तो बेहतर हो ही रही है, सैकड़ों करोड़ की बिजली की बचत भी हो रही है और लोगों का जीवन भी आसान हो रहा है।


प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार ऐतिहासिक नगरों की धरती है। यहां हजारों सालों से नगरों की एक समृद्ध विरासत रही है। प्राचीन भारत में गंगा घाटी के ईर्द-गिर्द आर्थिक, सांस्कृति और राजनीतिक रूप से समृद्ध और संपन्न नगरों का विकास हुआ लेकिन गुलामी के लंबे कालखंड ने इस विरासत को बहुत नुकसान पहुंचाया। आजादी के बाद के शुरुआती कुछ दिनों में बिहार में बड़े और दूरदर्शी नेताओं का नेतृत्व मिला, जिन्होंने गुलामी के काल में आई विकृतियों को दूर करने की भरसक कोशिश भी की लेकिन इसके बाद एक दौर ऐसा भी आया जब बिहार में मूल सुविधाओं के निर्माण और लोगों को आधुनिक सुविधाएं देने के बजाय, प्राथमिकताएं और प्रतिबद्धताएं पूरी तरह बदल गई।

इसक नतीजा यह हुआ कि राज्य में गवर्नेंस से फोकस ही हट गया और बिहार के गांव और ज्यादा पिछड़ते गए। समृ़द्धि के प्रतीक शहरों की आधारभूत संरचनाओं का बढ़ती आबादी और बदलते समय के हिसाब से उन्नयन हो ही नहीं पाया। सड़कें, गलियां, पीने का पानी और सीवरेज जैसी अनेक मूल समस्याओं को या तो टाल दिया गया या फिर जब भी इससे जुड़े काम हुए तो वह घोटालों की भेंट चढ़ गए।

श्री मोदी ने कहा कि जब शासन पर स्वार्थनीति हावी हो जाती है, वोट बैंक का तंत्र व्यवस्था को दबाने लगता है तो सबसे ज्यादा प्रभाव समाज के प्रताड़ित, वंचित और शोषितों पर पड़ता है। बिहार के लोगों ने इस दर्द को दशकों तक सहा है। उन्होंने कहा कि जब पानी और सीवरेज जैसी मूल जरूरतों को पूरा नहीं किया जाता तो दिक्क्तें माताओं, बहनों, गरीबों, दलितों, पिछड़ों और अतिपिछड़ों को होती है। गंदगी में रहने और गंदा पानी पीने से लोगों को बीमारियां पकड़ लेती हैं। ऐसे में उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा इलाज में लग जाता है। कई बार परिवार अनेक वर्षों तक कर्ज तले दब जाते हैं। इन परिस्थतियों के कारण बिहार में एक बहुत बड़े वर्ग ने कर्ज, बीमारी, लाचारी और अशिक्षा को अपना भाग्य मान लिया था। इस प्रकार से सरकारों की गलत प्राथमिकताओं के कारण समाज के एक बड़े वर्ग के आत्मविश्वास पर गहरी चोट की गई। गरीब के साथ इससे बड़ा अन्याय और क्या हो सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते डेढ़ दशक से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी तथा उनकी टीम ने समाज के इस सबसे कमजोर वर्ग के आत्मविश्वास को लौटाने का भरपूर प्रयास किया है। विशेष तौर पर जिस प्रकार बेटियों की पढ़ाई लिखाई को, पंचायती राज एवं स्थानीय निकाय में वंचित-शोषित समाज के लोगों की भागीदारी को प्राथमिकता दी गई है उससे उनका आत्मविश्वास बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से एक प्रकार से बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं का करीब-करीब पूरा नियंत्रण ग्राम पंचायत या स्थानीय निकायों को दे दिया गया है। अब योजनाओें की प्लानिंग से लेकर अमलीकरण और उनकी देखरेख के काम का जिम्मा अब स्थानीय निकाय स्थानीय जरूरतों के हिसाब से कर पा रहे हैं। यही कारण है कि अब केंद्र और बिहार सरकार के साझा प्रयासों से बिहार के शहरों में पीने के पानी और सीवर जैसी मूल सुविधाओं के ढांचे में निरंतर सुधार हो रहा है।


श्री मोदी ने कहा कि मिशन अमरुत और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत बीते चार-पांच सालों में बिहार के शहरी क्षेत्र में लाखों परिवारों को पानी की सुविधा से जोड़ा गया है। आने वाले वर्षों में बिहार देश के उन राज्यों में होगा, जहां हर घर पाइप से पानी पहुंचने लगेगा। यह बिहार के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। यह बिहार का गौरव बढ़ाने वाली बात
होगी। उन्होंने कहा कि आज का यह कार्यक्रम एक विशेष दिन पर हो रहा है। आज हम इंजीनियर दिवस भी मना रहे हैं। यह दिन देश के महान के इंजीनियर एम. विश्वेश्वरैया की जयंती का है, उन्हीं की स्मृति को समर्पित है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे इंजीनियरों ने देश के निर्माण में और दुनिया में भी अभूतपूर्व योगदान किया है। चाहे काम को लेकर समर्पण हो या उनकी बारीक नजर। भारतीय इंजीनियरों की दुनिया में एक अलग ही पहचान है। यह सच्चाई है और हमें गर्व है कि हमारे इंजीनियर देश के विकास को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं। 130 करोड़ देशवासियों के जीवन को बेहतर कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के काम में बहुत बड़ा योगदान बिहार का भी है। बिहार तो देश के विकास को नई ऊंचाई देने वाले लाखो इंजीनियर देता है। बिहार की धरती तो आविष्कार और नवाचार का पर्याय रही है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आज नमामि गंगे परियोजना और अमरुत मिशन के तहत बिहार में 543.28 करोड़ रुपये की सात परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। इसके तहत पटना में 43 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) क्षमता वाले बेऊर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) एवं 37 एमएलडी क्षमता के करमलीचक एसटीपी, छपरा जलापूर्ति योजना (प्रथम चरण), सीवान जलापूर्ति योजना (प्रथम चरण) का उद्घाटन शामिल है। इसके अलावा उन्होंने मुंगेर जलापूर्ति योजना, जमालपुर जलापूर्ति योजना एवं मुजफ्फरपुर नदी तट विकास योजना का शिलान्यास भी किया।