तबलीगी जमात के सदस्य
भारत में एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए लोग। फाइल फोटो

नई दिल्ली। कोरोना वायरस से बचाव के लिए जिस समय विश्व की आधी से अधिक आबादी अपने घरों में कैद थी, उस समय नई दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस्लामिक प्रचारक स्व. मुहम्मद इलियास अल-कांधलवी ने 1927 में तबलीगी जमात की स्थापना की थी, उसी जमात का कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम 13 मार्च से आरंभ हुआ। अनेक विदेशी लोग भी टूरिस्ट वीजा लेकर भारत आये। दिल्ली में प्रतिबंधात्मक आदेशों के बीच में कार्यक्रम आयोजित हुआ, इसकी जानकारी किसी को भी नहीं लगनी थी, अगर तेलंगाना राज्य में चार लोगों की मौत के बाद मामला देशभर में सुर्खियां नहीं बनता। यह सभी लोग दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल थे। यहां से कोरोना वायरस लेकर वे अपने घरों को लौटे।

जो जानकारी सामने आयी है, उसके अनुसार मलेशिया की राजधानी कुआंलपुर में 27 फरवरी से 1 मार्च तक तबलीगी जमात का कार्यक्रम हुआ था। इसमें 16 हजार से अधिक लोग शामिल हुए थे, जिसमें 1500 के लगभग विदेशी प्रचारक थे। कोरोना नामक वैश्विक महामारी के बीच इतनी बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने के उपरांत इनके स्वास्थ्य की जांच के आदेश दिये गये। लगभग 11 हजार लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गयी। इस दौरान तक दो लोगों की मौत भी हो चुकी थी। न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक मलेशिया में जमात की एक बैठक में हिस्‍सा लेने वाले 620 लोग कोरोना वायर से संक्रमित हो गए हैं।

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यह जानकारी सामने आने के बाद पूरे विश्व में हड़कम्प मच गया। क्योंकि कार्यक्रम में इंडोनेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, ब्रुनेई, कंबोडिया, थाईलैंड और वियतनाम के लोग भी शामिल थे, जो अपने देश को लौट गये थे। मलेशिया सरकार ने इसकी सूचना संबंधित देश की सरकार को पहुंचा दी।

कोरोना वायरस का प्रसार करने में तबलीगी जमात कामयाब रही थी। इसी दौरान पाकिस्तान शासित पंजाब के लाहौर शहर में भी जमात ने कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें भी अनेक विदेशी लोग शामिल हुए। यह कार्यक्रम 11 से 15 मार्च तक आयोजित किया गया। पाकिस्तान सरकार ने जानकारी होने के बावजूद गंभीर कार्यवाही नहीं की और यह कार्यक्रम अब पाकिस्तान के पंजाब सूबे में कोरोना वायरस के प्रसार का भी कारण बन गया है। पाकिस्तानी अखबार द डॉन के अनुसार सिंध के हैदराबाद शहर में ही कम से कम 36 लोगों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। यह सभी जमात के सदस्य अथवा कार्यक्रम में शामिल थे। सिंध के आईजीपी मुश्ताक अहमद महार ने सभी पुलिस कर्मचारियों को आदेशित किया है कि तबलीगी जमात के सदस्यों को मरकस (प्रचार केन्द्र) में ही रखा जाये और इसको ही क्वारंटीन केन्द्र बना दिया जाये।

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निजामुद्दीन में है मुख्यालय

वहीं आज तक न्यूज चैनल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि तबलीगी जमात में शामिल लोगों ने दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मुख्यालय में 13 मार्च से कार्यक्रम आरंभ किया था। इस कार्यक्रम में अनेक विदेशी भी शामिल हुए। इसके अतिरिक्त 19 राज्यों से करीबन 34 सौ लोगों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम 20 मार्च तक चला। रिपोर्ट के अनुसार 16 मार्च को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की कि कोरोनो वायरस के मद्देनजर 31 मार्च तक दिल्ली में आयोजित धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक कार्यक्रम में 50 से अधिक लोगों को जमा होने की अनुमति नहीं होगी। इस घोषणा के बाद भी वे लोग मरकज में रहे। 20 मार्च को मरकज में आयोजित जलसे में शामिल होने वाले 9 इंडोनेशियाई नागरिक तेलंगाना जा पहुंचे, जहां उनकाे कोरोना से संक्रमित पाया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का आह्वान किया। इसके उपरांत 23 मार्च को करीबन 1500 लोगों ने मरकज खाली कर दिया और अपने स्थानों को लौट गए।

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वहीं तेलंगाना में चार कोरोना रोगियों की मौत के बाद यह जानकारी सामने आयी कि सभी लोग दिल्ली की निजामुद्दीन मरकस में आयोजित तबलीगी जमात के जलसे में शामिल हुए थे तो राज्य सरकार ने इसकी सूचना केन्द्र तक पहुंचा दी। 27 फरवरी को मरकस में जाकर जांच की गयी तो कोरोना के संक्रमण के शक में 6 संदिग्धों को मेडिकल चेकअप के लिए मरकज से दूर ले जाया गया और बाद में हरियाणा के झज्जर में उन लोगों को एक आइसोलेशन फैसीलिटि में रखा गया। 28 मार्च को डब्ल्यूएचओ की टीम को लेकर एसडीएम मरकस पहुंचे और 33 लोगों को वहां से मेडिकल चेकअप के लिए ले जाया गया। उन सभी को दिल्ली के राजीव गांधी कैंसर अस्पताल में भर्ती कराया गया। 29 मार्च की शाम को सरकारी एजेंसियों ने लोगों को बसों में भरकर स्वास्थ्य केन्द्रों तक जांच के लिए ले जाना आरंभ कर दिया। यह कार्य आज शाम तक पूर्ण हो पाया। सभी लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गयी है।

आज तक के अनुसार जमात के जलसे में शामिल 93 लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। सभी का सैंपल पॉजिटिव निकला है। इसमें से 45 तमिलनाडु, 9 अंडमान और 24 केस दिल्ली के हैं। वहीं, 303 ऐसे लोग हैं जिनमें कोरोना के लक्षण हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश से 4 और केस सामने आए हैं जिनकी ट्रैवल हिस्ट्री मरकज की रही है। विशाखापट्टनम से भी 21 केस सामने आए हैं।

क्या है तबलीगी जमात?

इस्लामी प्रचारक इलियास अल-कांधलवी ने 1927 में तबलीगी जमात स्थापना की थी। तबलीगी उर्दू का शब्द है, जिसका हिन्दी अनुवाद है- इस्लामी धर्म का प्रचार करने वाला। जमात का मतलब होता है संगठन अर्थात समूह। मरकस का मतलब होता है केंद्र। इसका मुख्यालय दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित है। वैसे देश के हर हिस्से में इसका मरकज है। हालांकि हिन्दूवादी संगठन यह भी आरोप लगाते रहे हैं कि मुगल काल में कई लोगों ने इस्लाम धर्म कबूल किया था, लेकिन फिर भी वो लोग हिंदू परंपरा और रीति-रिवाज को ही अपना रहे थे। इसको देखते हुए मौलाना इलियास अल- कांधलवी ने इनमें इस्लामिक भाव पैदा करने के लिए प्रचार किया और तबलीगी जमात का गठन किया। इसका मुख्यालय गठन के उपरांत से ही दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में ही है। हालांकि विश्व के अनेक देशों में इसके प्रचार केन्द्र हैं।