जब हम अहिंसा की बात करते हैं तो हमें यह पढ़ाया जाता है कि दूसरों पर प्रहार नहीं करना। दूसरों को क्षति नहीं पहुंचाना। किंतु जब हम प्रभु यीशू के जीवन का अध्ययन करते हैं तो हमें यह भी शिक्षा मिलती है कि अगर किसी व्यक्ति ने हमारे को क्षति पहुंचाई है तो भी उसको अगर हम माफ करते हैं तो यह भी ईश्वर का ही आदेश है।

प्रभु यीशू जब लोगों को मानवता का पाठ पढ़ा रहे थे तो उस समय मानवता के अनेक दुश्मनों ने उन पर अत्याचार किये। उनको इतने कष्ट दिये, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती किंतु प्रभु यीशू ने उन लोगों को माफ भी कर दिया। क्या इस संसार में ऐसा कोई दूसरा उदाहरण हमें देखने को मिल सकता है।

प्रभू यीशू के वह उपदेश जो हमें सदैव प्रेरणा देते हैं :

ईसा मसीह ने अवैध तरीके से कमाये गये धन को भी गलत बताया है। उन्होंने कहा है कि उस व्यक्ति को भला क्या फायदा, जिसे अगर पूरी दुनिया मिल जाये लेकिन अपनी आत्मा को खोने की पीड़ा सहनी पड़े।

ऐसे आपको मिल जायेगा स्वर्ग का खजाना : प्रभु यीशू का यह भी कहना था कि गरीबों की सेवा ही सबसे बड़ी खुशी का माध्यम है। यही स्वर्ग है। उन्होंने कहा है कि अगर आप एकदम सही होना चाहते हैं तो जाओ, अपनी सारी सम्पत्ति को गरीबों में बांट दो। तुम्हें स्वर्ग का खजाना मिल जायेगा।

उन्होंने मानव जीवन की ओर से किये जाने वाले कार्यों की भी सहज तरीके से व्याख्या की है और उसी प्रकार से आम व्यक्ति तक पहुंचाया भी है। प्रभु यीशू का कहना है कि व्यक्ति को व्याभिचारिता नहीं करनी चाहिये, व्यक्ति को हत्या नहीं करनी चाहिये, व्यक्ति को कभी चोरी नहीं करनी चाहिये, व्यक्ति को लालच नहीं करना चाहये और व्यक्ति को अपने पड़ोसी को अपना समझकर प्रेम करना चाहिये।

प्रभु यीशू ने यह भी कहा है, मैं तुमसे कहता हूं कि अपने दुश्मनों से प्यार करो और उनके लिए प्रार्थना करो जो तुमको सताते हैं। इससे तुम उस पिता की संतान बन जाओगे जो स्वर्ग में है। वह अपना सूर्य बुराई और अच्छाई दोनों पर डालता है और न्यायी व अन्यायी दोनों पर अपनी वर्षा करता है।

इसा मसीह ने कहा कि मैं मनुष्य को एक-दूसरे से प्रेम का महत्व भी बताया है। उन्होंने कहा है तुम्हें एक नया आदेश देता हूं कि एक-दूसरे से प्रेम करो। जैसे मैने तुमसे किया है।

प्रभी यीशू ने बताया कि लोगों को सिर्फ रोटी के लिए नहीं जीना चाहिये बल्कि भगवान के मुख से निकले हर शब्द की मुताबिक जीना चाहिये।

मनुष्य के स्वभाव के बारे में भी प्रभु यीशू का कहना है, उनको जो खुद की प्रशंसा करते हैं, उनको विनम्र किया जाये और जो खुद का विनम्र करते हैं, उनकी प्रशंसा होगी।