चुनाव के लिए मतदान
The voters of sriganganagar. file photo

श्रीगंगानगर। राजस्थान में 49 नगर निकाय चुनावों के लिए प्रथम चरण में चुनाव हो रहा है। इनमें श्रीगंगानगर नगर परिषद भी शामिल है, जिसके 65 वार्डों में पार्षद पद के लिए नामांकन पत्र गत दिवस दाखिल किये गये। बुधवार को नामांकन पत्रों की जांच के बाद प्रशासन पब्लिक को यह बताने में असमर्थ रहा कि कितने भावी पार्षद के नामांकन पत्र निरस्त किये गये हैं और इसके पीछे कारण क्या रहे?

नगर निकाय चुनाव सम्पन्न करवाने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने के दावे जिला प्रशासन की ओर से किये गये थे।

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प्रशासन नामांकन पत्र दाखिल करने के अन्तिम दिन रात 10 बजे तक यह बताने में असमर्थ रहा कि कितने प्रत्याशियों के नामांकन पत्र दाखिल किये गये हैं। यहां तक जिला निर्वाचन विभाग के प्रवक्ता तक यह जानकारी देने में सफल नहीं हुए ।

वहीं बुधवार को नामांकन पत्रों की जांच प्रक्रिया का कार्य किया गया। यह कार्य पशुपालन विभाग के एक डॉक्टर के भरोसे ही छोड़ दिया गया। यह संवाददाता रात 9 बजे आरओ कार्यालय पहुंचा तो वहां तहसीलदार के साथ पशु पालन विभाग का एक चिकित्सक लिस्ट तैयार करवाते हुए नजर आये।

इससे साफ हो गया कि चुनाव प्रक्रिया को कितनी गंभीरता से लिया गया है।

वहीं रात 11 बजे आधिकारिक जानकारी दी गयी। इसमें यह नहीं बताया गया कि कितने प्रत्याशियों के फार्म कैंसिल किये गये हैं। फार्म कैंसिल करने के पीछे कारण क्या रहे।

आधी-अधूरी जानकारी पब्लिक को देकर प्रशासन ने अपने कर्तव्य को पूर्ण कर लिया।

चुनाव प्रकिया में जनता कई घंटे तक लाइन में लगकर मतदान करती है और उसको पांच साल तक जैसे लम्बे समय के लिए प्रत्याशी का चयन करना होता है। प्रशासन से पब्लिक उम्मीद करती है कि वह अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए प्रभावशाली लोगों को हावी नहीं होने दे और एक निष्पक्ष व पब्लिक हितों की रक्षा करने वाली कार्यवाही करे, लेकिन आज ऐसा नहीं हो पाया।

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प्रशासन ने मीडिया को जो आधिकारिक जानकारी दी गयी है, उसमें चुनाव मैदान में बचे हुए प्रत्याशियों बारे बताया गया है। 65 वार्ड में कितने प्रत्याशी का फार्म कैंसिल किया गया। कैंसिल करने के पीछे कारण क्या रहे? अनेक सवाल थे। पब्लिक को इन सवालों के उत्तर सार्वजनिक रूप से मिलने चाहिये थे, किंतु इनके उत्तर देने के बारे में किसी ने भी मेहनत करना बेकार समझा।

आज की कार्यवाही से यह भी साफ हो गया है कि प्रशासन नगरपालिका चुनावों को कितनी गंभीरता से ले रहा है। वह प्रभावशाली लोगों को मनमर्जी रोकने से रोक पायेगा? यह सवाल है, जिसका उत्तर प्रशासन की आज की कार्यवाही से आज मिल गया है। अगर प्रशासन ने ऑनलाइन किसी वेबसाइट पर रिजकेट फार्म की जानकारी दी है, तो उसका लिंक भी सार्वजनिक नहीं किया गया।

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