पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान
पाक पीएम इमरान खान। फाइल चित्र।

समाचार वही होता है, जो इंसान की बेहतरी के लिए कार्य करे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि समाचार की टीआरपी क्या रही। डिजिटल दुनिया में दूसरे देश में भी समाचार का एकाएक क्या प्रभाव जाता है, यह भी देखने को मिला।

महंगाई से त्रस्त पाकिस्तान की जनता 140 रुपये प्रति लीटर दूध खरीद रही है। एक आम ढाबे पर एक रोटी के लिए 20 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। दवाइयां एमआरपी से अधिक बिक रही हैं। दैनिक मजदूरी करने वाला व्यक्ति जिसको शाम को पूरे दिन काम करने के बाद जेब में 200 से 250 रुपये आने हैं, उससे वह कैसे अपना व अपने बच्चों का पेट पाल पायेगा। छोटा दुकानदार जो पूरे दिन की मेहनत के बाद शाम को 400 रुपये तक कमाता होगा वह क्या अपने बच्चों को रात को दूध पिला पाता होगा?

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यह हालात एक दिन के दिन नहीं है। मुद्रास्फीती सितंबर के आखरी सप्ताह में लगभग 13 प्रतिशत हो चुकी है।

इमरान सरकार के आने के बाद से ही महंगाई एकाएक बढ़ने लगी। इस साल सरकार ने जो बजट जारी किया, उसमें खाद्य वस्तुओं पर भारी टैक्स लगाया गया तो महंगाई ने विकराल रूप धारण कर लिया।

पाकिस्तान में जुलाई माह से नया वित्तीय वर्ष आरंभ होता है और इस दौरान महंगाई बढ़ती चली गयी। मुनाफाखोरी का आलम यह रहा है कि अब दवाइयाें के विक्रेता भी मनमर्जी कर रहे हैं।

यह संयोग देखिये कि सांध्यदीप ने गुरुवार को पाकिस्तान की महंगाई से संबंधित समाचार विश्व समाचार/ पाकिस्तान में महंगाई सरकार के नियंत्रण से बाहर, दूध-दवा की भी कालाबाजारी शीर्षक के साथ प्रकाशित किया और इमरान खान ने शुक्रवार को मुनाफाखोरी पर आपात बैठक का आयोजन किया। इसमें पाकिस्तान के चार में से तीन राज्यों के मुख्यमंत्री भी बुलाये गये।

पाक पीएम ने मुनाफाखोरी रोकने के लिए कार्यवाही के आदेश दिये, किंतु भ्रष्टाचार के दल-दल में फंसे देश में अधिकारी कितनी ईमानदारी से काम कर आम जनता को राहत पहुंचा पाते हैं, यह देखने वाला होगा।

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