देश के हिन्दी समाचार
नरेन्द्र मोदी, 15 अगस्त 2020 को देश को संबोधित करते हुए।

पीएम नरेंद्र मोदी 9 सितंबर, 2020 को मध्य प्रदेश के सड़क विक्रेताओं के साथ ‘स्वनिधि सम्मान’ का आयोजन करेंगे। केन्द्र सरकार ने COVID-19 से प्रभावित गरीब स्ट्रीट वेंडर्स की मदद के लिए, 1 जून को पीएम स्वनिधि योजना शुरू की थी, जो आजीविका गतिविधियों को फिर से शुरू करती है।

लगभग हर अंतर्राष्ट्रीय मंच में भारत की मजबूत उपस्थिति-मोदी

मध्य प्रदेश में 4.5 लाख स्ट्रीट वेंडर पंजीकृत थे, जिनमें 4 लाख से अधिक विक्रेताओं को पहचान और वेंडर प्रमाणीकरण दिया गया था। पोर्टल के माध्यम से 2.45 लाख पात्र लाभार्थियों के आवेदन बैंकों को प्रस्तुत किए गए हैं, जिसमें से 140 करोड़ रुपये की राशि के लगभग 1.4 लाख स्ट्रीट वेंडरों को स्वीकृति प्रदान की गई है। मध्य प्रदेश राज्य स्वीकृत कुल आवेदनों की संख्या में पहले स्थान पर है, इनमें से 47% अकेले राज्य से आते हैं।

378 नगर निकायों में एलईडी स्क्रीन के माध्यम से सार्वजनिक स्थानों पर कार्यक्रम देखने के लिए राज्य में योजना के लाभार्थियों की व्यवस्था की गई है।

कार्यक्रम का प्रसारण वेबकास्ट के माध्यम से किया जाएगा, जिसके लिए MyGov के लिंक https://pmevents.ncog.gov.in/ पर प्री-रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री राज्य के 3 लाभार्थियों के साथ उनके वेंडिंग स्थानों से वस्तुतः संपर्क करके भी उनसे बातचीत करेंगे।

कुपोषित बच्चों के जीवन को सहज बनाने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास की जरूरत

भारत देश में गरीबी और कुपोषण दो ऐसे जहर हैं, जो हर साल सैकड़ों की जिंदगी को निगल जाते हैं। यह दोनों आपस में जुड़े हुए हैं। कुपोषण है तो गरीबी है और गरीबी है तो कुपोषण है।

पिछले वर्ष सर्दियों में राजस्थान में इसी तरह के मामले में अनेक बच्चों की मौत हो गयी थी। यह घटना हड़ौती के कोटा क्षेत्र से सामने आयी थी, जहां से प्रदेश के शहरी विकास मंत्री शांति धारीवाल प्रतिनिधित्व करते हैं। उस घटना के समय विपक्ष और मीडिया के साथ-साथ सत्तापक्ष के कुछ विधायकों ने भी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाये थे और जिम्मेदारी तय करने की मांग की गयी थी।

मरने वाले बच्चों में अनेक कुपोषित थे। राजस्थान के मेवाड़ और हड़ौती क्षेत्र में यह गंभीर समस्या है। कुपोषित महिलाएं जब गर्भवती होकर बच्चों को जन्म देती हैं तो बच्चे भी जन्म के समय ही कुपोषित हो जाते हैं। बिहार, झारखण्ड़, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि भी राज्य ऐसे हैं जहां कुपोषण की सबसे बड़ी समस्या है।

बिहार में सबसे अधिक कुपोषित बच्चे हैं। कुपोषण के दो कारण हैं। इन राज्यों में गरीबी बहुत है। छोटी आयु में लड़कियों की शादी कर दी जाती है और मां बनने पर कुपोषित मां फिर कुपोषित बच्चे को जन्म देती है। आयु के अनुसार वजन में कमजोर, छोटे कद का रह जाना ऐसी समस्याएं हैं, जो हमें नजर आती हैं।

कुपोषण को समाप्त करने के लिए स्कूलों में बच्चों को दोपहर का भोजन दिया जाता है। यह योजना दशकों से चल रही है। कागजों में तो यह योजना सफल है जब हकीकत में देखा जाये तो कुपोषण कम नहीं हो रहा है। कई हजार करोड़ रुपये का बजट जारी होता है और कुपोषण को समाप्त करने का कार्य कागजों में पूर्ण हो जाता है। मॉनिटरिंग व्यवस्था कमजोर होने के कारण कुपोषण को जड़ से खत्म नहीं किया जा सका है।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, न्यूयार्क शहर को बंद करना होगा

गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की नियमित जांच का कार्य भी गांव स्तर पर नहीं हो पाता। सामुदायिक व निजी अस्पताल गांवों से काफी दूर होते हैं और वहां तक परिवहन की भी पर्याप्त व्यवस्था का अभाव है। हालांकि संस्थागत प्रसव का प्रतिशत बढ़ा है।

ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। अगर सरकार वर्तमान परिस्थितियों में उन गर्भवती महिलाओं की उचित देखभाल करती है जिनका प्रसव दिसंबर अथवा जनवरी माह में होने वाला है तो निश्चित रूप् से हम अनेक शिशुओं के जीवन को बचा सकेंगे। इस कार्य को गंभीरता से लिया जाना आवश्यक है।