किसान आत्महत्या
हनुमानगढ़ में आत्महत्या के मामले।

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के गांव छापांवाली निवासी महेन्द्र पुत्र मुखराम वर्मा ने पिछले दिनों एक बैंक का नोटिस मिलने के उपरांत आत्महत्या कर ली।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार छापांवाली गांव सादुलशहर तहसील क्षेत्र में आता है और मुखराम वर्मा ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की धानमंडी शाखा से करीबन 5.50 लाख का लोन लिया था। समय पर वह ब्याज का भुगतान नहीं कर पाया। लोन की राशि बढ़कर साढे 8 लाख रुपये हो गयी थी। मुखराम का अगस्त 2018 में आक्समिक निधन हो गया था।

देश में जब भी कोई किसान कर्ज तले दबकर आत्महत्या करता है तो मीडिया के लिए यह हॉट न्यूज होती है। वह इसको प्रमुखता से प्रसारित करता है। नेताओं के लिए यह बड़ा मुद्दा बन जाता है और वह इसको कैश करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं रखते। विभिन्न तरह की मांग रखी जाती है। मांग पूरी हो या नहीं हो, नेताओं का नाम खूब चमक जाता है। सरकार और प्रशासन के दरवाजे 24 घंटे के लिए खुल जाते हैं जो सबसे आगे होकर प्रदर्शन करता हुआ फोटो में आ जाता है।

किसान की आत्महत्या के मामले का महिमा मंडन इस तरह से किया जाता है जिससे अन्य किसान भी उससे दुष्प्रेरित होते हैं।

जो किसान कुछ साल पूर्व आत्महत्या कर चुके हैं, उनके परिवार के वर्तमान हालात क्या हैं, यह कोई भी जनता के सामने नहीं लाता। आत्महत्या का मामला दो-तीन दिन तक अखबार की सुर्खियां बनता है और फिर सब लोग भूल जाते हैं। आत्महत्या करने से किसानों के परिवार की हालत में सुधार आ सकता है? या आया है? इसका एक भी जीवंत प्रमाण नहीं है।

महेन्द्र वर्मा के आत्महत्या मामले में जब जांच की गयी तो अनेक जानकारियां सामने आयी हैं।
एसबीआई से लोन उनके पिता मुखराम वर्मा ने लिया था। उनका निधन अगस्त 2018 में हो गया किंतु बैंक में इसकी लिखित में जानकारी तक नहीं दी गयी।

लोन की राशि का भुगतान नहीं होने पर एसबीआई के अधिवक्ता ने मुखराम वर्मा के नाम पर ही नोटिस जारी किया।
इस संबंध में एसबीआई का पक्ष जानने के लिए सम्पर्क किया गया तो सर्किल मैनेजर देवीलाल मेहरा बताते हैं कि जो नोटिस जारी किया गया वह मुखराम वर्मा के नाम से था।

उन्होंने यह भी बताया कि जारी किये गये नोटिस में जमीन को कुर्क करने की चेतावनी तक नहीं दी गयी थी। नोटिस में सिर्फ यह चेताया गया था कि अगर समयबद्ध भुगतान नहीं किया गया तो लोन को डिफाल्टर की लिस्ट में डाला जा सकता है।

वहीं कानून के जानकारों का भी मानना है कि जमीन को कुर्क करने से पूर्व अनेक नोटिस जारी किये जाते हैं। सरफेसी एक्ट की कार्यवाही जिला कलक्टर के आदेशों के उपरांत होती है।
ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि श्रीगंगानगर में पिछले कुछ सालों में किसी भी सार्वजनिक बैंक ने एक भी किसान की जमीन को कुर्क नहीं किया है। जमीन की कुर्की से पहले जिला प्रशासन की अनुमति आवश्यक होती है और प्रशासन इस संबंध में कभी भी असंवेदनशील रवैया नहीं अपनाता।

जिस तरह से सिगरेट के डिब्बे पर लिखा होता है कि धूम्रपान जानलेवा है। उसी तरह से लोन के लिए किये गये अनुबंध में यह लिखा गया होता है कि लोन का भुगतान नहीं किये जाने पर कानूनी कार्यवाही हो सकती है और उसी के अनुसार ही बैंक मैनेजर, बैंक से अनुबंधित अधिवक्ता से नोटिस जारी करवाते हैं। अनुबंध की शर्तें व्यापारी, नौकरीपेशा, किसानों सहित सभी वर्ग पर लागू होती हैं।

लोन उतना ही लें, जितनी आवश्यकता हो :
एक अधिवक्ता ने बताया कि अक्सर यह देखा गया है कि कुछ लोग मकान, दुकान अथवा कृषि भूमि पर अत्यधिक लोन राशि ले लेते हैं। समय पर भुगतान नहीं होने पर बैंकर्स जब नोटिस जारी करते हैं तब वे मानसिक तनाव में आ जाते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि लोन उतना ही लें, जितनी आवश्यकता हो।

विवाह-शादी, बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए लोन लेना ही प्राथमिकता होनी चाहिये। अन्यथा किसी भी वर्ग का व्यक्ति हो, वह लोन के दल-दल में फंस कर परेशान हो उठता है।

एसबीआई से लोन लिया है, परेशानी में हैं तो एक बार सर्किल मैनेजर से जरूर मिलें
किसी भी किसान/व्यापारी को परेशानी हो तो वह सर्किल मैनेजर देवीलाल मेहरा से मिल सकते हैं। उनको अपनी परेशानी के बारे में जानकारी दे सकते हैं।

ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि एसबीआई का श्रीगंगानगर सर्किल का वार्षिक टर्नओवर 5 हजार करोड़ के करीब है। इतने बड़े नेटवर्क का संचालन देवीलाल मेहरा जैसे योग्य अधिकारी कर रहे हैं। इसका कारोबार प्रतिवर्ष अन्य प्रतिस्पर्धी वित्तीय संस्थाओं से ज्यादा बढ़ रहा है। श्री मेहरा दूसरों का दर्द समझने वाले अधिकारी हैं।