श्रीरामचंद्र जी मैया सीता, लक्ष्मण व हनुमान जी के साथ।
श्रीरामचंद्र जी का दरबार। भगवान श्रीरामचंद्र जी स्वयं। उनके साथ है सीता मैय्या, अनुज लक्ष्मण जी और भगवान के महान सेवक, महादेवता श्री हनुमान महाप्रभु जी।

अयोध्यानगरी में भगवान श्रीरामचंद्र जी का आगमन हो चुका था। पूरी अयोध्यानगरी को दीपों से सजाया जा चुका था। घर-घर में सजावट हो रही थी। नगरी के लोगों को भरोसा था कि भगवान उनके घर पर भोजन के लिए आयेंगे। अनेक गरीब लोग भी थे। खाने को भोजन नहीं था, फिर भी उनको भगवान श्रीरामचंद्र जी पूरा भरोसा था कि अब उनका राज्याभिषेक हो चुका है और वे गरीब लोगों के घर पर भोजन करने के लिए आयेंगे। उनके भी अन्न के भंडार भर जायेंगे। धन के कोष भर जायेंगे।

अनेक लोगों की इच्छाएं भी थी कि भगवान श्रीराम चंद्र जी के दर्शन भी कर आएं। उनको न्यौता भी दे आएं किंतु अयोध्या ही नहीं अपितु दूसरे राज्यों के राजा, मंत्री, सेनाएं, संत, ऋषि-मुनि, जनता सब भगवान के दर्शन को पहुंच रहे थे।

लगातार व्यस्त कार्यक्रम के बीच में भगवान श्रीरामचंद्र जी का ध्यान इस तरफ नहीं गया कि उनके महासेवक हनुमान जी ने भोजन किया है या नहीं। उन्होंने स्नान किया है या नहीं। वे अयोध्यानगरी में प्रसन्न हैं भी नहीं।

कई दिनों के उपरांत भगवान श्रीरामचंद्र जी दरबार से राजमहल की ओर जा रहे थे तब उनकी नजर महाभक्त, भगवान श्री हनुमान जी पर गयी। उनको यह स्मरण आया कि कदाचित वह उनको भूल तो नहीं गये थे। मन में जिज्ञासा हुई तो श्रीरामचंद्र जी ने परम सेवक को कहा, आज आप मेरे साथ भोजन कीजिये।

राजमहल में भगवान श्रीरामचंद्र जी के चरणों में बैठकर भगवान हनुमान भोजन कर रहे थे। उस समय तीनों लोकों के नाथ और अयोध्यानगरी के नरेश, श्रीरामचंद्र जी कहते हैं, प्रिय हनुमान! क्या आप प्रसन्न तो हैं। व्यस्तताओं के कारण अनेक दिनों बाद आपसे संवाद हो रहा है।

हनुमान श्री ने कहा, प्रभु आपके साथ रहकर मन तो सदा प्रफ्फुलित रहता है। आपकी कृपा से मन कैसे अप्रसन्न हो सकता है।

तब अयोध्यानगरी नरेश ने कहा, प्रिय! मैं आपको कुछ भेंट करना चाहता हूं, जो इच्छा हो, उस अभिष्ट वस्तु की मांग कर लो।

परमसेवक, कलयुग के धर्मरक्षक, हनुमान प्रभु कहते हैं, प्रभु! आप कुछ देना चाहते हैं तो मुझे इस योग्य बनाएं कि सदा आपकी नगरी में मेरा वास रहे। जो आपको पुकारे, उसकी सहायता के लिए मैं सक्षम हो सकूं।

हे प्रभु! मैं सदा आपके चरणों में रहूं। धर्म की रक्षा, भारतवासियों के कल्याण के लिए सदा-सदा योग्य रह सकूं।

भगवान सदा दयालु रहते हैं। भक्तों की कृपा बनाये रखते हैं। उन्होंने कहा, ऐसा ही होगा। यह वर पाकर वीर बजरंग बली बहुत ही प्रसन्न हुए। उनका मन बहुत ही ज्यादा प्रफ़्फुलित था।

संतों की ओर से सुनाये जाने वाले प्रसंग में से यह भी एक प्रसंग कलयुग में बहुत ही प्रचलित है अर्थात आज भी भगवान श्रीराम से प्राप्त किये गये वरदान के अनुरूप महावीर बजरंग बली कलयुग में धर्म की रक्षा के लिए सदा-सदा सजग रहते हैं। भक्तों पर स्वामी की कृपा सदा बनी रहनी चाहिये।

“वॉल स्ट्रीट जर्नल” खुद विवादों में, कंपनी के मालिक पुत्र ही सम्पादकीय नीतियों से प्रसन्न नहीं

वाशिंगटन। अमेरिका में ही नहीं अपितु विश्वभर में अपने विश्वसनीय समाचारों के लिए चर्चा में रहने वाले वॉल स्ट्रीट जर्नल का विवाद कम नहीं हो रहा। कंपनी के मालिक रूपर्ट मर्डोक के पुत्र जेम्स ने कंपनी की सम्पादकीय नीतियों से अप्रसन्न होकर इस्तीफा दे दिया था।

जेम्स मर्डोक ने न्यूज कॉर्प के बोर्ड को पत्र लिखा, ‘‘कंपनी के अखबारों द्वारा प्रकाशित कुछ संपादकीय विषय वस्तु और कुछ अन्य नीतिगत फैसलों पर मेरी असहमति के कारण मैं इस्तीफा दे रहा हूं।’’

यह शुक्रवार की घटना है और इसके बाद अमेरिका की राजनीति में भी भूचाल आ गया था। इसका कारण यह भी है कि कंपनी के मालिक रूपर्ट मर्डोक, जो भारत में भी स्टार नेटवर्क का संचालन करते हैं, अमेरिका में उनकी वॉल स्ट्रीट जर्नल के अतिरिक्त न्यूयार्क पोस्ट के नाम से भी प्रकाशन संस्थान है।

रूपर्ट ने 2007 में वॉल स्ट्रीट जर्नल बिजनेस पेपर को खरीद किया था। इसके बाद से ही इसके सम्पादकीय क्षेत्र में दक्षिणपंथी विचारधारा ने मजबूती से कदम मजबूत किये।

दक्षिण पंथी विचारधारा वाली वॉल स्ट्रीट जर्नल ने गूगल के सीईओ सुंदर पिचई को भी अपमानित करने के लिए सुंदर पिन्चई शब्दों का अनेकों बार इस्तेमाल किया और इसको लेकर इस बिजनेस न्यूज पेपर की जमकर आलोचना भी होती रही।

जेम्स की रुचि डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति रही। इस बीच डेमोक्रेटिक पार्टी ने जैसे ही भारतवंशी कमला हैरिस को उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया, वेसे ही वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपने वार भारत पर करने आरंभ कर दिये।

कमला हैरिस को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जाना, अमेरिका की आंतरिक राजनीति का हिस्सा हो सकता है। अमेरिका में पहली बार भारतवंशियों को महत्व मिल रहा है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दीपावली और होली पर भारतीयों के लिए कार्यक्रम आयोजित किये। इसके साथ ही पिछले दिनों एक कार्यक्रम व्हाइट हाउस में हुआ, जिसमें भारतीय शास्त्र ज्ञाताओं ने मंचोच्चारण से पूजा की थी जिसका सीधा प्रसारण हुआ था।

ऐसे अनेक कार्यक्रम अमेरिका में पिछले कुछ समय के दौरान हुए हैं जिससे वहां भारतीयों का मान-सम्मान बढ़ा है। इसमें भारतीयों की मेहनत को भी नजरांदाज नहीं किया जा सकता।

डेमोक्रेटिक पार्टी ने गत दिवस ही भारतीयों के लिए अपना विजन प्रस्तुत किया था, जिसमें भारत के साथ सामरिक, राजनीतिक रिश्ते मजबूत बनाने पर बल दिया जायेगा।

वहीं श्री ट्रम्प इसी साल भारत की यात्रा कर हजारों भारतीयों के बीच यह कह चुके हैं कि उनको भारतीय मित्र बहुत पसंद हैं। भारतवासियों में भी राष्ट्रपति ट्रम्प के प्रति स्नेह कम नहीं हुआ है।

अमेरिका में 3 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव हैं और इस बीच वॉल स्ट्रीट जर्नल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका यात्री की एक तस्वीर प्रकाशित कर दी। इसका लाभ भी वहां दक्षिणपंथी नेताओं को मिल सकता है। भारत के किसी भी राजनीतिक दल ने वहां किसी भी पार्टी को समर्थन देने का एलान नहीं किया है। अमेरिका में चुनाव, अमेरिका का आतंरिक मामला है और भारत सदा ही निष्पक्ष भाव से रहता रहा है।