अशोक गहलोत
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत।

श्रीगंगानगर। हनुमानगढ़ एसपी राशि डोगरा। एक जांबाज आईपीएस ऑफिसर हैं। श्रीगंगानगर में वे सीओ सिटी के पद पर रही हैं। उस समय उनको जानने का मौका मिला था। उनकी कार्यप्रणाली में काफी पारदर्शिता रहती है। लोगों की पीड़ा को समझती हैं। अपने कार्यालय में शिकायत लेकर आने वाले लोगों को गंभीरता से सुनती ही नहीं बल्कि उनकी समस्याओं का समाधान भी करती हैं। उनके कार्यालय में आने वाले शिकायतों के निस्तारण का रेट अन्य अधिकारियों से काफी बेहतर है। वे शिकायत का निस्तारण करने के लिए निस्तारण नहीं करती बल्कि परिवादी को न्याय दिलाना अपना कर्तव्य समझती हैं। जब ऐसे अधिकारी होते हैं तो पुलिस पर विश्वास करना काफी आसान हो जाता है। उनकी प्रशंसा करने की इच्छा व्यक्त होती है किंतु मुझे आज पहली बार अफसोस के साथ लिखना पड़ रहा है कि उनके कार्यकाल में कैंचियां चौकी पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लग रहे हैं।

आज जब देश और दुनिया जिस दौर से गुजर रहे हैं, उस समय पुलिस 24 घंटे पहरा दे रही है। लोगों की जीवन की सुरक्षा के लिए कार्य कर रही है। पुलिस की लापरवाही उजागर हो तो ऐसी घटनाओं को पत्रकार के लिए नजरांदाज करना उसका धर्म बन जाता है। किंतु जब एक सीनियर सिटीजन की अवैध पिटाई और उसको बिना किसी कार्य जबरन हवालात में डालने का हो तो उसको बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। परिवार का मुखिया जो परिवार की प्रतिष्ठा का प्रतीक होता है, उसको बिना कसूर पूरी रात हवालात में रखा जाये तो उसके मन और दिल पर किस तरह का आघात हो चुका होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है।

हनुमानगढ़ जिले की कैंचियां पुलिस चौकी के प्रभारी रामपाल पर पिछले कुछ समय से मानवाधिकार उल्लंघन के सीधे आरोप लगते रहे हैं। पुलिस अधीक्षक चाहें तो इन शब्दों के आधार पर गांव-गांव में एक ईमानदार अधिकारी भेजकर जांच भी करवा सकती हैं और उस समय उन्हें पता लगेगा कि इस ग्रामीण क्षेत्र में किस तरह से पुलिस मानवाधिकारों का “मान-सम्मान” कर रही है।

राज्य सरकार ने लॉकडाउन के दौरान किसानों को खेत में जाकर कार्य करने के लिए मंजूरी प्रदान की हुई है। बीती रात 83 एलएनपी निवासी जगदीश चंद्र बिश्नोई खेत में काम करने के उपरांत घर पर आ रहे थे। ट्रैक्टर पर थे। खेत के काम आने वाले कुछ छोटे बड़े उपकरण भी उनके ट्रैक्टर पर थे। जगदीश चंद्र के पुत्र सुशील बिश्नोई बताते हैं कि 83 एलएनपी, जोड़कियां जो कैंचियां चौकी का इलाका भी नहीं आता, इसके बावजूद सिविल वर्दी में आये चौकी प्रभारी, सहायक उप निरीक्षक रामपाल ने लाठियों से उसके पिता पर हमला कर दिया। उनके कपड़े फाड़ दिये। उसके चाचा और भाई वहां पर पहुंचे तो तीनों को जबरन गाड़ी में डाल लिया और उसके उपरांत उनको गोलूवाला थाना में ले गये। वहां पर तीनों को 151 सीआरपीसी में बंद कर दिया गया। आरोप लगाया गया कि शांति भंग कर रहे थे।

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सुशील बिश्नोई कहते हैं कि खेत में काम करने के उपरांत घर पर आना कब से शांति भंग की श्रेणी में आ गया? सुशील का सवाल उस समय वाजिब भी लग जाता है, जब सीनियर सिटीजन को पीट-पीटकर उसको घायल ही नहीं किया जाता बल्कि उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए बिना किसी कसूर के उसको हवालात में भी पूरी रात गुजारनी पड़े।

सच यह भी है कि इस समय गंभीर अपराध पर ही पुलिस आरोपी को हवालात में ले जा रही है। आबकारी तक के मामलों में थाना पर ही जमानत लेकर छोड़ा जा रहा है तो एक खेत मालिक को पूरी रात बिना कसूर हवालात में गुजारकर उसके जीवन के साथ खिलवाड़ किया गया।

वहीं सुशील बिश्नोई बताते हैं कि उनके भाई तो गांववासियों को शिक्षित करने के लिए स्कूल का संचालन करते हैं। उनको भी हवालात में डाल दिया गया और उनके चाचा के साथ भी उसी तरह का व्यवहार हुआ।

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यह माना जा सकता है कि वर्तमान समय पुलिस की आलोचनाओं का नहीं है, लेकिन रामपाल जैसे पुलिस कर्मचारी देश भर के उन हजारों नहीं बल्कि उन लाखों पुलिस कर्मचारियों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं जो पुलिस की छवि “जनता मित्र” की बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को पहली बार जनता से खुला मान-सम्मान भी मिल रहा है। पुलिस कर्मचारी जरूरतमंद के घर पर भोजन भी पहुंचा रहे हैं।