प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प।

नई दिल्ली। व्यापार मंत्री पियूष गोयल ने आशा जताई है कि अमेरिका और भारत के बीच एक बड़ा व्यापारिक समझौता जल्द ही हो सकता है। इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार अगले पांच सालों में बढ़कर 238 बिलियन डॉलर तक हो सकता है।

2020 राष्ट्रपति चुनाव से पहले डोनाल्ड ट्रम्प भारत के बड़े बाजार में अमेरिकी उत्पादों की ज्यादा से ज्यादा पहुंच बनाने के लिए प्रयासरत हैं और इसी कारण वे लगातार बड़ा व्यापार समझौता होने का बयान दे रहे हैं।

श्री ट्रम्प चाहते हैं कि भारत अपने बाजार को उसके कृषि क्षेत्र के लिए खोले। इसके लिए उसको ज्यादा टैरिफ नहीं देना पड़े। अमेरिका रक्षा, वाणिज्यिक विमान, तेल, कोयला और मशीनरी जैसे क्षेत्र में भी ज्यादा सहूलियत चाहता है।

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वहीं भारत अमेरिका से अपने दवा उद्योग के साथ-साथ आईटी व मोटर वाहन क्षेत्र में ज्यादा सुविधाओं की मांग कर रहा है। भारतीयों के लिए अमेरिका यात्रा सुलभ हो सके, इसके लिए अमेरिका से अपनी वीजा नीति पर भी पुनर्विचार के लिए कह रहा है।

इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सितंबर में अमेरिका यात्रा में भी मतभेदों के कारण व्यापार समझौता नहीं हो पाया था। अमेरिका अपनी ऑनलाइन कंपनियों वॉलमॉर्ट स्वामीत्व वाली फ्लीपकॉर्ट तथा अमेजन के लिए भी नियमों में रियायत दिये जाने की मांग भारत से कर रहा है।

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आज व्यापार मंत्री पियूष गोयल ने बयान दिया है कि दोनों देशों के बीच जो मतभेद थे, उनमें से अधिकांश को दूर कर दिया गया है। समाचार एजेंसी के अनुसार श्री गोयल का कहना है कि दोनों देश ऐसी स्थिति में पहुंच गये हैं, जहां प्रथम चरण का व्यापारिक समझौता हो सकता है।

ध्यान रहे कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी विदेश नीतियों को भी व्यापार से जोड दिया है। इस कारण विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में उथल-पुथल मची हुई है। ट्रम्प ने भारत को दी जाने वाली रियायत को समाप्त करने का एलान कर दिया था, जिसके बाद भारत ने भी अमेिरकी सामान पर टैरिफ बढ़ा दिया था।

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