डोनाल्ड ट्रम्प
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नये कानून पर हस्ताक्षर किये।

वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले एक महीने से चल रहे हिंसक प्रदर्शनों पर रोक लगाने के लिए एक कड़े कानून के लिए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिये हैं। इस तरह से अमेरिका में अब स्मारक, मूर्तियों और सम्पत्ति को नुकसान गंभीर अपराध माना जायेगा।

अमेरिका में रंग और धर्म के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं : डोनाल्ड ट्रम्प

संयुक्त राज्य अमेरिका में मई माह के आखरी हफ्ते में हिंसक आंदोलन आरंभ हो गये थे। एंटी फॉसिस्ट नामक संगठन पर राष्ट्रपति श्री ट्रम्प ने आरोप लगाये थे कि इस संगठन ने हिंसा को जन्म दिया।

यूएसए में आरंभ हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे एंटीफा संगठन ने यूरोप तक पहुंचा दिया था। इस संगठन ने अपनी ताकत को प्रदर्शित कर दिया था। हालांकि इससे पहले गत वर्ष फ्रांस में भी हिंसक प्रदर्शन हुए थे। उस समय महंगाई को मुद्दा बनाया गया था और हजारों लोग पीले जैकेट्स पहनकर आंदोलन कर रहे थे। उस समय राष्ट्रपति इमैनुअल मार्केन को भी शायद यह नहीं पता होगा कि वामपंथी संगठन उसके देश में प्रवेश कर चुका है। मजबूत हो चुका है। पेरिस और अन्य शहरों में निजी और सरकारी सम्पत्ति को आग लगायी जा रही थी। पुलिस चाहकर भी इन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही नहीं कर पायी थी क्योंकि अभिव्यक्ति की आजादी को स्वतंत्रता तो है किंतु हिंसक होने पर क्या कार्यवाही की जा सकती है, यह वहां स्पष्ट कानून नहीं था।

ट्रम्प ने डेमोक्रेटिक पार्टी को लिया निशाने पर, निष्पक्षता के लिए मतपत्रों से हो चुनाव

जॉर्ज फ्लायड नामक व्यक्ति की पुलिस हिरासत में मौत के बाद यह संगठन हिसंक होकर व्हाइट हाउस के नजदीक भी पहुंच गया था, जहां सुरक्षा कर्मचारियों ने उनको खदेड़ा। यह आंदोलन उन राज्यों में ज्यादा हिंसक हुआ, जहां डेमोक्रेटिक पार्टी का शासन था। इस कारण यह माना गया था कि डेमोक्रेटिक पार्टी इस हिंसक आंदोलन को खुला समर्थन दे रही है।

व्हाइट हाउस की ओर से ट्वीट कर यह जानकारी दी गयी है कि राष्ट्रपति ने हिंसक आंदोलन की रोकथाम के लिए कानून बनाने पर कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिये हैं।

वहीं राष्ट्रपति श्री ट्रम्प ने भी बताया है कि स्मारको, मूर्तियों को क्षति पहुंचाने वाले अराजकतत्वों के खिलाफ कार्यवाही के लिए कानून बनाया है। उन्होंने कहा कि इसमें लम्बी अवधि तक जेल में रहने का कड़ा प्रावधान किया गया है।

दूसरी ओर अपने बयानों के कारण सदा विवादों में रहने वाले डेमोक्रेटिक नेता जोई बाइडेन ने एक बार फिर अपने बड़बोलेपन के कारण लोगों के निशाने पर आ गये हैं। श्री बाइडेन ने कहा है कि 120 मिलियन लोगों की मौत कोविड-19 के कारण हो चुकी है।

राष्ट्रपति ने अपने संभावित प्रतिद्वंद्वी बाइडेन के इस झूठ के खिलाफ मीडिया से आह्वान किया है कि वे इसका पर्दाफाश करें।

पाकिस्तान में पेट्रोल मूल्य बढ़ोतरी से इमरान सरकार फिर निशाने पर

दक्षिण एशियाई देश, पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में अचानक ही बढ़ोतरी कर दी गयी है। तेल मूल्य आज 66 प्रतिशत तक बढ़ा दिये गये हैं।

इमरान सरकार ने शनिवार को अचानक ही निर्णय लिया और तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच गयीं। एकाएक इतनी बड़ी बढ़ोतरी किये जाने को लेकर पाकिस्तान के मुख्य विपक्षी नेता बिलावल भुट्‌टो ने इसे गरीब जनता पर एक और प्रहार बताया है।

वहीं सरकार पर आरोप लगाया गया है कि उसकी तेल माफिया के साथ सांठगांठ है ओर उसको लाभ पहुंचाने के लिए महीने की पहली तारीख का भी इंतजार नहीं किया गया।

ध्यान रहे कि पाकिस्तान में इन दिनों कालाबाजारी बड़े जोरों पर थी। लोगों को पेट्रोल लेने के लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा था।