ट्रम्प और जॉनसन
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन

नई दिल्ली। भारत और चीन को छोड़कर विश्व के अन्य देशों को मंदी का सामना करना पड़ सकता है। एशिया में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में भी इजाफा हो सकता है। विश्व के आर्थिक मामलों को देखने वाली यूनाइटेड नेशंस की एक टीम ने कोरोना वायरस के बाद उत्पन्न हुए हालात के बाद अपनी ट्रेड रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है। 30 मार्च की इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया है।

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अपनी रिपोर्ट में यूएन के आर्थिक जानकारों का मानना है कि कोरोना वायरस के बाद विश्व को 2009 से भी बड़ी महामंदी का सामना करना पड़ सकता है। विकासशील देशों में विदेशी निवेश कम से कम सवा दौ सौ लाख रुपये तक घट सकता है। विश्व की दो तिहाई आबादी विकासशील देशों में रहती है और वहां 187.50 लाख करोड़ रुपये के सहायता पैकेज की आवश्यकता है।

सोमवार को जारी रिपोर्ट में वर्ल्ड बैंक ने कहा कि पहले अनुमान था कि पूर्वी एशिया और एशिया पैसिफिक में इस साल करीब 3.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आ जाएंगे, इनमें से 2.5 करोड़ अकेले चीन के होंगे। लेकिन, अब ऐसा अनुमान है कि आर्थिक हालात और बिगड़ते हैं तो गरीबों की संख्या में 1.1 करोड़ का इजाफा हो जाएगा।

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भारत और चीन को मंदी से बाहर रखा

यूएन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पूर्वी एशिया और एशिया पैसिफिक की जीडीपी ग्रोथ इस साल 2.1% रह सकती है। यह माइनस 0.5% तक भी फिसल सकती है। जबकि पिछले साल तक 5.8% ग्रोथ का अनुमान था। भारत-चीन को मंदी से प्रभावित होने वाले देशों की सूची से बाहर रखा गया है, इसका कारण स्पष्ट नहीं किया गया है, किंतु माना जा रहा है कि दोनों देशों की आबादी को देखकर यह अनुमान लगाया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के दिनों में विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों ने बड़े पैकेज घोषित किए हैं। जी-20 के मुताबिक ये देश आने वाले दिनों में इकोनॉमी के लिए सपोर्ट को 375 लाख करोड़ रुपए तक बढ़ाएंगे।