माइकल पोम्पियो
माइकल आर. पोम्पियो ने एस जयशंकर से की मुलाकात। पुराना चित्र

वाशिंगटन। अमेरिका के विदेशमंत्री माइकल आर. पोम्पियो ने संयुक्त राष्ट्र संघ की एक बैठक में कहा है कि ईरान जिस तरह से हथियार खरीदने के लिए कोशिशों में जुटा हुआ है, उससे भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी खतरा पैदा हो सकता है।

श्री पोम्पियो ने कहा कि ईरान को अपने परमाणु हथियार को समाप्त करने के लिए अक्टूबर माह तक का वक्त दिया गया था और यह अवधि समाप्त होने वाली है। विदेशमंत्री ने आरोप लगाया कि ईरान रूस से हथियार खरीदने की कोशिश कर रहा है जिससे रियाद, नई दिल्ली, रोम आदि शहरों को भी खतरा उत्पन्न हो जायेगा।

उनका यह भी कहना था कि कोरोना वायरस को देखते हुए अमेरिका ने मानवीय सहायता की पेशकश की थी, किंतु ईरान ने उनके सहायता प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

अमेरिकी विदेशमंत्री ने यह भी कहा कि ईरान, भारत या ऑस्ट्रेलिया की तरह एक जिम्मेदार लोकतंत्र नहीं है। उनका कहना था कि अगर अमेरिका प्रतिबंधों को समाप्त करता है तो ईरान कुछ प्रतिबंधित संगठनों को हथियार मुहैया करवाकर सीरिया, वनेजुएला और अफगानिस्तान तक खतरा पैदा कर सकता है।

उनका यह भी आरोप था कि जनवरी में, ईरान ने अपनी स्वयं की उन्नत मिसाइलों के साथ इराक में अमेरिका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना पर हमला किया।
उल्लेखनीय है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ चुका है। विगत दिवस ही ईरान ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत 35 लोगों के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी का वारंट जारी किया था। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ईरान के फ़ार्स न्यूज़ के हवाले से लिखा है कि ईरान के सरकारी वकील अली अल-क़ासिम मेहर ने इसकी जानकारी दी है। ईरान ने यह वारंट अपने सैन्य कमांडर जनरल क़ासिम सुलेमानी की हत्या के आरोप में जारी किया।

ध्यान रहे कि अमेरिका प्रस्ताव लाया है जिसमें ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों को बढ़ाने की बात कही गयी है। हालांकि रूस और चीन इसका विरोध करने की बात कर रहे हैं।

ईरान में विस्फोट 13 की मौत

वहीं मंगलवार रात को ईरान की राजधानी तेहरान के उत्तर में एक निजी अस्पताल के तहखाने में विस्फोट होने से कम से कम 13 लोगों की मौत हो गयी। समाचार एजेंसी एएनआई ने रिपोर्ट दी है कि अस्पताल के तहखाने में ऑक्सीजन टैंक में विस्फोट हो गया, जिस कारण यह हादसा हुआ।

पाकिस्तान पर एक और प्रतिबंध

पाकिस्तान को एक और झटका लगा है। पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस को यूरोप में हवाई सेवाओं के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। आज यह जानकारी पीआईए के प्रवक्ता ने मीडिया को दी।

पाक के द डॉन समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार यूरोपियन यूनियन एयर सेफ्टी एजेंसी ने पाकिस्तानी पायलटों की फर्जी डिग्री का मामला सामने आने के बाद यह कदम उठाया है। कराची में एक हवाई दुर्घटना के बाद पाकिस्तान में पायलट्स की जांच हुई तो पता चला कि 25 प्रतिशत पायलट्स फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंसधारी बने हुए हैं।

इससे पहले अनेक देशों ने पाकिस्तानी पायलट्स को अपने देश में उड़ान के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार खाड़ी में पाकिस्तान के पारंपरिक सहयोगी – कुवैत, क़तर, संयुक्त अरब अमीरात के अलावा ओमान ने कथित तौर पर पाकिस्तान मूल के पायलटों को फर्ज़ी लाइसेंस मामले की वजह से हटाने का फ़ैसला किया है। ख़बरे भी आईं कि पश्चिम एशिया के सबसे पुराने एयरवेज़ में से एक कुवैत एयरलाइन ने अपने सभी सातों पाकिस्तानी मूल के पायलटों को हटा दिया है।

ब्रिटेन स्थित एक पाकिस्तानी मूल के पत्रकार गुल बुखारी ने ट्वीट किया, “फर्ज़ी लाइसेंस मामले को लेकर कुवैत एयरवेज़ ने सभी 7 पाकिस्तानी पायलटों को हटा दिया है, 56 इंजीनियर को निलंबित कर दिया है और हैंडलिंग स्टाफ को भी हटा दिया है. ऐसी ही ख़बरें क़तर, ओमान, अमीरात और वियतनाम से भी आ रही हैं।”

सिविल एविएशन सेक्टर पर नज़र रखने वाले एक विशेषज्ञ ने “इकोनॉमिक टाइम्स” से कहा कि अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संस्था को इसका संज्ञान लेना चाहिए और बल्कि यात्रियों के व्यापक हित को देखते हुए पाकिस्तानी इंटरनेशनल एयरलाइन्स को सस्पेंड करने के बारे में भी सोचना चाहिए।