एंटोनियो गुटेरेस
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस

जैनेवा। संयुक्त राष्ट्र संघ से भारत ने शांति अभियान के लिए किये गये योगदान के बदले में क्षतिपूर्ति के 3.8 करोड़ डॉलर के भुगतान की मांग की है। भारत का आरोप है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शांति अभियान निधि की राशि का इस्तेमाल कर्मचारियों के वेतन के रूप में भुगतान कर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र संघ इस समय गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। उसके पास अगले माह कर्मचारियों का वेतन के रूप में भुगतान करने के लिए भी बजट नहीं है।

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भारत के स्थायी उप प्रतिनिधि के नागराज नायडू ने कहा कि भारत यूएन को दिये जाने वाले अपने सहयोग राशि का नियमित रूप से भुगतान कर रहा है। भारत उन 35 देशों में है, जो इस विश्व संगठन के बजट का अपना पूरा हिस्सा समय पर देता है। भारत ने 31 जनवरी 2019 तक अपने नियमित बजट मूल्यांकन का 2.32 करोड़ अमेरिकी डॉलर दे दिया था

महासभा की पांचवीं समिति (प्रशासनिक और बजटीय मामले) के मुख्य सत्र ‘संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय स्थिति में सुधार’ में बोलते हुए नायडू ने कहा कि भारत सहित 27 टीसीसी, समूह 77 के 17 देश, अभी भी समाप्त हो चुके शांति अभियानों के लिए अपनी वैध प्रतिपूर्ति का इंतजार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हम टीसीसी के भुगतान को अनिश्चितकाल के लिए नहीं टाल सकते, जबकि उस फंड का इस्तेमाल दूसरे भुगतान के लिए किया जा रहा है।’’

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नायडू ने कहा कि महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बंद शांति निधि का इस्तेमाल कर्मचारियों को वेतन देने के लिए किया है, ताकि ‘‘वित्तीय सुदृढ़ता की झूठी भावना के लिए योगदान दिया जा सके।’’

उल्लेखनीय है कि यूएन ने भारत को 3.8 करोड़ डॉलर का भुगतान करना है जो विश्व में सर्वाधिक है।