अमेरिका के समाचार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प। फाइल् फोटो

अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए आगामी 3 नवंबर को मतदान होना है। पूरी दुनिया की नजर इस चुनाव और प्रचार पर लगी हुई हैं। इसका कारण भी है, अमेरिका दुनिया की एक सुपर पॉवर है। यह अमेरिका की ही शक्ति है कि आज दुनिया के करीबन 700 करोड़ लोग स्वयं को सुरक्षित समझते हैं। उनको अहसास है कि दुनिया पर कोई गंभीर संकट नहीं आ सकता। कभी तीसरा विश्व युद्ध नहीं हो सकता।

अगर हम इतिहास में जाएं तो 1 सितंबर 1939 को दूसरा विश्व युद्ध आरंभ हुआ था। 6 साल तक युद्ध चला और लाखों लोग मारे गये। लाखों लोग बेघर हो गए। विभिन्न देशों के हजारों सैनिक शहीद हो गए। दुनिया में गरीबी और बेरोजगारी पैदा हो चुकी थी। अनेक देशों में अन्न और अस्पतालों में दवाइयां नहीं थी। उस 6 साल के युद्ध के बाद कई सालों तक दुनिया इस सदमे से बाहर निकलने का प्रयास करती रही।

दूसरे विश्व युद्ध को 80 साल हो चुके हैं। इसके बाद कभी तीसरे विश्व युद्ध की आशंका पैदा नहीं हुई। इसका मुख्य कारण है, अमेरिका ने दुनिया के अभिभावक की भूमिका को अदा किया। आतंकवाद को समाप्त करने के लिए सैनिक भेजे तो सीमा क्षेत्र को लेकर जहां भी विवाद सामने आया, वहां मध्यस्थता कर युद्ध को समाप्त करवाया।

अमेरिका के युद्धक विमान, टैक्नोलॉजी दुनिया में सबसे सर्वोत्तम मानी गयी है। उसको चुनौती कभी नहीं दी जा सकी। मेड इन यूएसए का लेबल देखकर ही दुनिया भर के लोग वस्तु को महंगी दर पर भी खरीदने को तैयार रहते रहे हैं। इसका कारण था दुनिया का अमेरिका के प्रति विश्वास।

जो टैक्नोलॉजी अमेरिका की शक्ति थी और है, वह कुछ साल पहले चीन को हस्तांतरित भी हुई है। अमेरिका की अनेक कंपनियां चीन पहुंची। वहां कमजोर बौद्धिक सम्पदा कानून के कारण अमेरिका की तकनीक चीनी कंपनियों के हाथों में आ गयी और उन्होंने अमेरिका के ब्रांडेड सामान की नकल कर उसको सस्ते दामों पर बेचा। इसका अमेरिका को कितना नुकसान हुआ, यह किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है।

डोनाल्ड ट्रम्प से पूर्व के समय को देखा जाये तो जो नौकरियां अमेरिकी नागरिकों को मिलनी चाहिये थी, जो लाभ अमेरिकी कंपनियों को मिलना चाहिये था, जो लाभ वहां के श्रमिकों को मिलना चाहिये था, वह सब चीन तक पहुंच गया।

ट्रम्प ने कार्यभार संभालने के बाद सबसे बड़ा कार्य करोड़ों लोगों को स्थायी देकर किया। लाखों लोगों के लिए नयी नौकरियां सृजित की। अमेरिका की अर्थव्यवस्था जो कमजोर हो रही थी, उसको वापिस ऊंचाई तक पहुंचाया। अमेरिका की सुपर पावर की उपलब्धि को वापिस दिलाया।

वहीं चीन जो अमेरिकी कंपनियों के उत्पाद की नकल कर अमेरिका को ही सामान सस्ते दामों पर बेच रहा था, उसको बड़ा झटका लगा। तेज रफ्तार से बढ़ रही उसकी अर्थव्यवस्था कमजोर हो चुकी है। अमेरिकी कंपनियां वापिस अमेरिका लौटने लगी हैं। अब तकनीक की चोरी नहीं हो रही है।

क्या यह डोनाल्ड ट्रम्प की बड़ी सफलता नहीं है? कोरोना काल में जब रोजगार की सबसे बड़ी आवश्यकता है तो उस समय भी अमेरिकियों के पास रोजगार के बेहतर विकल्प मौजूद हैं। आर्थिक विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था की गति अगले वित्त वर्ष में करीबन-करीबन 4 फीसदी या इससे अधिक रहेगी।

डोनाल्ड ट्रम्प वहीं है जो संसद में अमेरिकी हितों के लिए लड़ते हैं। उन्होंने मैक्सिको सीमा पर दीवार बनाने का बड़ा निर्णय लिया तो उनका जमकर विरोध किया गया।

ट्रम्प यही चाहते थे कि कोई भी व्यक्ति देश में बिना अनुमति प्रवेश नहीं करे। पिछले गेट से गैर कानूनी रूप से किसी का देश में प्रवेश नहीं हो। इसमें डोनाल्ड ट्रम्प का कोई निजी हित था? हर व्यक्ति को पता है कि इसमें ट्रम्प का निजी हित नहीं था। वे प्रशासन में पारदर्शिता चाहते थे/ हैं। वे चाहते हैं कि अमेरिका में जो भी रोजगार की तलाश, टूरिस्ट, छात्र सहित अन्य क्षेत्र में आना चाहता है, वह सरकार से अनुमति लेकर आये। वीजा लेकर आये। सरकार के पास उसका रिकॉर्ड हो।

अमेरिका 9/11 को भूल नहीं सकता और ट्रम्प भी चाहते हैं कि अनाधिकृत रूप से कोई ऐसा व्यक्ति प्रवेश नहीं कर जाये, जिसकी सोच अमेरिका या अमेरिकियों को नुकसान पहुंचाने की हो। वर्ल्ड ट्रेड सैंटर पूरी दुनिया में अमेरिका की शान हुआ करता था, जिसको एक हमले में ध्वस्त कर दिया गया। उसमें जिन लोगों ने अपने परिवारजन को खोया है, क्या वे यह दिन भूल सकते हैं।

राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रम्प की ड्यूटी थी कि वे अपने देश और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। इसी मुद्दे को विरोधी दलों ने नस्ल, रंग, धर्म आदि से जोड़कर प्रचार किया। अमेरिकी लोगों के लिए इस तरह से लड़ाई लड़ता हुआ राष्ट्रपति न तो पहले कभी आपने देखा होगा और न ही कभी उन जैसा फाइटर फिर दिखाई दे सकता है। अपने देश के लिए जो जज्बा ट्रम्प के दिल में दिखाई देता है वह करोड़ों लोगों में किसी एक व्यक्ति के पास होता है। यह जज्बा ट्रम्प ने हर मौके पर दिखाया है। उनकी अमेरिका फर्स्ट की नीति की पूरी दुनिया में सराहना हो रही है और अनेक राष्ट्राध्यक्ष भी अब अपने देश में इसका अनुसरण कर रहे हैं।

उनके राष्ट्र प्रेम को कुछ प्रकाशन संस्थान ने अलग-अलग रूप में परिभाषित भी किया किंतु इस सबके बावजूद वे दिन रात लगे रहे। वे विचलित नहीं हुए। उनकी रैलियों में भीड़ को कुछ टीवी चैनल्स नहीं दिखाना चाहते। यह भी सबको पता है। रैटिंग का भी खेल खेला गया, इसके बावजूद वे प्रचार में जुटे हुए हैं।

दुनिया में कुछ देश वैक्सीन बनाने का दावा भी कर रहे हैं किंतु विश्व के अधिकांश देश अभी भी अमेरिका की तरफ देख रहे हैं। इसका कारण है पिछले चार सालों के दौरान ट्रम्प ने दुनिया का विश्वास फिर से अमेरिकी कंपनियों की ओर बहाल किया है। विरोधी दल अमेरिकी कंपनियों की ओर से तैयार की जा रही वैक्सीन को लेकर भी भ्रमजाल फेलाना चाहते थे। वह यह भूल गये कि जो कंपनियां वैक्सीन तैयार कर रही हैं, उनमें ट्रम्प अथवा उनके परिवार के किसी सदस्य की हिस्सेदारी नहीं है। सब स्वतंत्र कंपनियां हैं। किसी पर कोई दबाव नहीं है और अमेरिका एक बार फिर से दुनिया को यह दिखाने की स्थिति में पहुंच चुका है कि उसकी रिसर्च आज भी दुनिया भर में अव्वल है। वह अपनी रिसर्च करने वाली कंपनियों को प्रोत्साहित करता रहा है और भविष्य में भी ट्रम्प के कार्यकाल के दौरान इसको और मजबूत किया जायेगा।

मानव कल्याण के लिए योजनाएं

अगर प्रभु यीशू के दिये उपदेश को याद किया जाये तो उनका कहना है कि गरीबों की गयी सेवा ही सबसे महान कार्य है। प्रभू यीशू के इन आदेशों को न केवल डोनाल्ड ट्रम्प बल्कि उनके परिवार के सभी सदस्यों ने अपनाया। व्हाइट हाउस की आर्थिक सलाहकार एवं उनकी पुत्री इवांका ट्रम्प स्वयं रोजगार के प्रबंधन का कार्य देख रही हैं। कोरोना काल के बीच में भी वे कारखानों में जाकर श्रमिकों से मिल रही हैं। उनको मिल रहे रोजगार और वेतन के संबंध में जानकारी ले रही हैं। उनको मिल रही सुविधाओं से अपडेट हो रही हैं।

इवांका ट्रम्प रोजगार कौशल पर भी स्वयं निगरानी कर रही हैं। कौशल के कार्यों की गुणवत्ता पर भी वे नजर रखे हुए हैं। आज उनके पुत्र जोसेफ का जन्मदिन है, इसके बावजूद वे जॉर्जिया में कुछ कारखानों में श्रमिकों के बीच में उपस्थित थीं और उनको मिल रहे रोजगार के संबंध में जानकारी हासिल कर रही थीं। फैक्ट्री मालिकों से भी उनका संवाद हुआ और उनको विश्वास दिलाया कि ट्रम्प प्रशासन ज्यादा से ज्यादा उत्पादन बढ़ाने के लिए कंपनियों के साथ है।

मानवता की भलाई के लिए सबसे बड़ा कार्य करते हुए डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल और बहरीन, यूएई के बीच शांति समझौता भी कराया। यह एतिहासिक कार्य रहा है और इससे अरब में शांति का एक मजबूत मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह अरब क्षेत्र में लाखों लोगों के जीवन को सुरक्षित करने वाला कदम हो सकता है क्योंकि युद्ध से किसी का भला नहीं होता। बम न तो धर्म देखकर फटता है और न ही रंग देखकर। बम फटने के बाद सिर्फ और सिर्फ रक्त दिखाई देता है। मानव का रक्त। डोनाल्ड ट्रम्प ने उस एतिहासिक समझौते को करवाया है जिसके बारे में पहले कभी नहीं सोचा जा सकता था। जिसके बारे में कभी विचार नहीं किया जा सकता था।

दुनिया अगर अमेरिका के चुनावों की ओर देख रही है तो इसका कारण भी यही है। सभी को मालूम है कि अगर डोनाल्ड ट्रम्प फिर से निर्वाचित हो जाते हैं तो अमेरिका एक सुपर पावर देश के रूप में और मजबूत होगा।

जब अमेरिका सुपर पावर होगा तो दुनिया में युद्ध, महामारी, गरीबी को समाप्त करने के लिए कार्य जारी रहेंगे। चुनावों में ट्रम्प का मुद्दा भी है, मेक अमेरिका ग्रेट अगेन। अमेरिका को एक बार फिर से सुपर पावर बनाने का सपना उन्होंने देखा, उसको पूरा भी किया है। ट्रम्प के विरोधी हों या मित्र, सभी यह मानते हैं कि ट्रम्प ने वो कर दिखाया जो कभी असंभव दिखाई देते थे।

उन्होंने इसको भी प्रभु यीशू का ही आदेश मानकर पूरा करवाया है। प्रभू यीशू ने कहा कि मैं तुम्हें एक नया आदेश देता हूं कि एक-दूसरे से प्रेम करो। जैसे मैने तुमसे किया है। एक-दूसरे से प्रेम करो। यही संदेश प्राप्त कर डोनाल्ड ट्रम्प ने स्वयं को समर्पित किया है। मीडिया में अपनी इमेज की परवाह नहीं की और उन्होंने मूल अमेरिकी लोगों के लिए संघर्ष किया है। जो अमेरिका के झण्डे से प्यार करता रहा है, उसको अपना बनाया है। उसके लिए उन्होंने रंग, जाति और धर्म को अनदेखा किया है। यही एक राष्ट्राध्यक्ष का कर्तव्य होता है जो उन्होंने ईमानदारी से निभाया है।

मतदान को ज्यादा दिन नहीं रहे हैं और उससे पहले मतदाताओं को यह विचार करना होगा कि वे अमेरिका फर्स्ट नीति के लिए दुनिया से लड़ने वाले एक फाइटर को फिर से व्हाइट हाउस में देखना चाहेंगे। वो फाइटर जो असंभव को भी संभव कर दिखा रहे हैं।