राजस्थान के कांग्रेस नेता सचिन पायलट
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट। फाइल चित्र

जयपुर। भारत के क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़े राज्य राजस्थान में इस समय सियासी घमासान भी चरम पर है। उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अपनी ही सरकार को लोकतंत्र विरोधी करार दे दिया है। उन्होंने एक बयान में कहा कि कांग्रेस की सोच लोकतंत्र को मजबूत करने की रही है और अशोक गहलोत ने नगर निकाय प्रमुखों के लिए जो आदेश जारी किया है, वह लोकतंत्र को मजबूत करने की भावना के खिलाफ है।

मुख्यमंत्री पद को लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच में विवाद है। दोनों ही गुट एक-दूसरे को पटकनी देने का प्रयास करते हैं।

लोकसभा चुनाव परिणामों से बुरी तरह सहमी गहलोत सरकार नगर निकाय चुनाव करवाने के लिए साहस ही नहीं जुटा पा रही है। वह अभी तक निकाय प्रमुख पदों के आरक्षण के लिए लॉटरी निकालने का कार्य नहीं कर पा रही है।

पांच अगस्त 2019 को संसद में जो हुआ, उसके बाद से ही राजस्थन में कांग्रेस सरकार बैकफीट पर नजर आ रही है। कश्मीर को लेकर मोदी सरकार के निर्णय के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अपनी पहली घोषणा पर ही यू टर्न लेना पड़ गया। मुख्यमंत्री ने नगर निकाय के प्रमुख के लिए चुनाव में अप्रत्यक्ष प्रणाली को अपनाने का निर्णय लिया।

अभी इस पर चर्चा ही हो रही थी कि बुधवार को शहरी विकास मंत्री शांति धारीवाल ने हाइब्रिड सिस्टम के जरिये नगर निकाय प्रमुख का चुनाव करवाने का निर्णय ले लिया। इसके बाद गैर पार्षद भी सभापति/चेयरमेन बन सकेंगे।  सरकार के इस निर्णय की ही जमकर आलोचना हो रही है।

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शुक्रवार को उप मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने झुंझुनूं में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि हाइब्रिड सिस्टम को अपनाने के बारे में कैबिनेट अथवा विधायक दल की बैठक में चर्चा तक नहीं हुई। संगठन को भी सरकार ने विश्वास में नहीं लिया। श्री पायलट ने यह भी आरोप लगाया कि जो घोषणा की गयी है उससे बैकडोर एंट्री को बढ़ावा मिलेगा। यह कांग्रेस की भावना के खिलाफ है। कांग्रेस ने सदैव लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए कार्य किया है।

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वहीं शहरी विकास मंत्री शांति धारीवाल एक और घोषणा के साथ शुक्रवार को मीडिया से मिले। उन्होंने बताया कि जोधपुर, जयपुर और कोटा नगर निगम को दो-दो भागों में बांटा जायेगा। जयपुर में 250 वार्ड होंगे। एक जयपुर हैरिटेज नगर निगम होगा तो दूसरा ग्रेटर। उन्होंने यह भी बताया कि तीनों नगर निगम में पुन: परिसीमन होगा। पूर्व में परिसीमन की अधिसूचना को विलोपित कर दिया गया है। इससे साफ हो गया है कि तीनों नगर निगम में आगामी नवंबर माह में चुनाव नहीं हो पायेंगे।

वहीं यह भी कहा जा रहा है कि 20 अक्टूबर को सरकार निकाय प्रमुखों के आरक्षण को तय करने वाली लॉटरी निकालने की प्रक्रिया को पूर्ण कर सकती है।

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