प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह। फाइल फोटो

नई दिल्ली। जून का महीना धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था और दिल्ली में कोरोना रोगियों की संख्या में इजाफा होने लगा था। कोरोना मरीजों के लिए बैड नहीं मिल रहे थे। कोरोना इलाज के लिए प्राइवेट हॉस्पीटल्स 20 लाख रुपये तक की राशि की मांग कर रहे थे। इस तरह के सनसनीखेज समाचार लगातार प्राप्त हो रहे थे और दिल्ली में रहने वाली डेढ़ करोड़ जनता के माथे पर पसीना नजर आ रहा था।

राज्य सरकार के हाथ-पांव फूल चुके थे। इस दौरान ही मनीष सिसोदिया ने पत्रकारों को यह जानकारी दी कि 31 जुलाई तक राजधानी में साढे पांच लाख कोरोना के मरीज होंगे। राज्य के उप मुख्यमंत्री का यह बयान चौंका देने वाला था।

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दिल्ली के डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस बयान से पूरे देश में खलबली मच गयी थी क्योंकि उत्तर भारत की प्रमुख व्यापारिक नगरी दिल्ली ही है। अगर वहां हालात हाथ से निकल जाते हैं तो समझा जा सकता है कि शेष भारत में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के प्रयासों में भारी क्षति पहुंचेंगी।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर भारत के राज्यों की पीड़ा को समझा। वे विराट व्यक्तित्व के धनी हैं। विपक्ष अपना काम करते हुए जो भी आरोप लगाये, प्रधानमंत्री उसकी तरफ ध्यान नहीं देते और सदैव दल-गत राजनीति से अलग विचार रखते हैं। उनके लिए देश पहले, राजनीति बाद में। अगर उन्होंने राजनीति ही करनी होती तो दिल्ली सरकार को हटाकर वहां राष्ट्रपति शासन के जरिये भी कोरोना को नियंत्रित करने के प्रयास कर सकते थे।

लेकिन श्री मोदी ने ऐसा नहीं विचारा। उन्होंने दिल्ली राज्य में कोरोना पर नियंत्रण की कमान देश के गृहमंत्री अमित शाह को सौंपी। श्री शाह ने पूरे दिल्ली का दौरा किया। डिस्पेंसरी से लेकर अन्य अस्पतालों में मौजूदा व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

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उन्होंने पूरी दिल्ली का मानचित्र अपने मस्तिष्क में तैयार किया और उसके अनुसार योजना बनायी। जून के मुकाबले जुलाई माह में 44 प्रतिशत मृत्युदर कम हुई है। यह दिल्ली सरकार के आकड़े हैं।

श्री सिसोदिया साढे पांच लाख केस होने की बात कह रहे थे और 27 जुलाई तक 1 लाख 31 हजार 219 केस ही सामने आये। इसमें भी एक लाख 16 हजार 372 मरीज तो रिकवर हो चुके हैं। एक्टिव केस की संख्या मात्र 10 हजार 994 ही रह गयी।

महानगरी, जहां आदमी को सांस लेने के लिए बैठने की जगह नहीं मिलती, उस राज्य में बिना लॉकडाउन किये कोरोना को नियंत्रित किया गया। 27 जुलाई को 613 केस आये थे। शेष सभी स्थानों पर अनेक मॉडल सामने आये और फेल हो गये क्योंकि कोरोना को नियंत्रित नहीं किया जा सका। वहीं दिल्ली में बिना लॉकडाउन के कोरोना रोग पर नियंत्रण पा लिया गया है।

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वहीं खेद की बात है कि अन्य राज्यों में इस तरह की स्थिति नहीं बन पायी है। बिहार में तो 16 से लेकर 31 जुलाई तक लॉकडाउन करना पड़ा है। फिर भी वहां 2 हजार से अधिक नये केस सामने आये हैं।

देशवासी केन्द्र सरकार से मांग कर रहे हैं कि कोरोना नियंत्रण के लिए कमान पूरी तरह से अमित शाह को सौंप दी जाये। इससे बिना लॉकडाउन किये ही कोरोना पर नियंत्रण पाया जा सकता है। अगर ऐसा संभव नहीं है तो देश में कम से कम शुक्रवार शाम से लेकर और सोमवार प्रात: तक सम्पूर्ण लॉकडाउन किया जाये ताकि कोरोना को नियंत्रित किया जा सके। फिगर रोजाना 46 हजार के आसपास हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री ने देश को विश्वास दिलाया है कि जल्दी ही एक दिन में 10 लाख जांच की क्षमता को हासिल कर लिया जायेगा। पीएम वीसी के जरिये पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश में नई लैब के शुभारंभ के मौके पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन है और इस दोरान लोगों को सतर्क रहना होगा।