दशहरा उत्सव के लिए तैयार रावण परिवार
दशहरा उत्सव में दहन के लिए तैयार किये गये रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले। फाइल फोटो

आठ अक्टूबर को मनाया जायेगा दशहरा उत्सव

विजय दशमी के दिन महिषासुर का भी माता दुर्गा ने किया था संहार

दशहरा उत्सव हर वर्ष भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम चंद्र ने युद्ध में रावण नामक असुर को हराया था। वहीं इस दिन भगवती देवी के अवतार दुर्गा माता ने नौ रात्रि के युद्ध के बाद महिषासुर का अंत किया था।

हिन्दू पंचाग के अनुसार अश्विनी मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा उत्सव मनाया जाता है। भारतीय ग्रंथों के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीरामचंद्र ने रावण का वध किया था।

रावण के परिवार में बहुत से सदस्य थे। माना जाता है कि उनके 100 संतान थी। हर वर्ष भारतीय दशहरा उत्सव के दौरान रावण के पुतलों का दहन करते हैं। इन पुतलों में रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले शामिल किये जाते हैं।

इन तीनों असुरों के पुतलों को इसलिए जलाया जाता है ताकि इससे मनुष्य बड़ी सीख ले सके।

भारतीय संतों द्वारा सुनाई गई कथाओं के अनुसार रावण एक अहंकारी मनुष्य था।

उसका भाई कुंभकर्ण महाआलसी था। वह छ: माह तक सोये रहता था और एक दिन भोजन करने के उपरांत वह फिर से छ: माह के लिए सो जाता था।

वहीं मेघनाथ रावण का पुत्र था। वह मायावी था। वह अपने रंग को बदलने में माहिर था। वह छल कपट करता था।

इसी कारण संतों ने समाज में शिक्षा देने के लिए हर वर्ष दशहरा उत्सव पर पुतले जलाने का निर्णय लिया। इससे मनुष्य को यह शिक्षा दी जाती है कि अंहकार, आलस्य और छल कपट सदा ही व्यक्ति के पतन का कारण होता है।

मनुष्य को यह बड़ी सीख देने के लिए ही अश्विनी मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को  विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है। पुतलों का दहन किया जाता है और मनुष्य को इससे सीख दी जाती है कि वह अहंकार, आलस्य और छल कपट को त्याग कर भगवान श्रीरामचंद्र की शरण को ही अपना लक्ष्य रखें।

वर्ष 2019 का दशहरा उत्सव आगामी 8 अक्टूबर को मनाया जायेगा। आगामी 29 सितंबर से नवरात्रि मेला आरंभ होगा। यह दुर्गा के नवरात्रि 8 अक्टूबर को सम्पन्न होंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here