पुलिस के समाचार
केसरीसिंहपुर में एक महिला ने फांसी लगाकर आत्महत्या की।

श्रीगंगानगर। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में एक महिला के आत्महत्या कर लेने के पश्चात पुलिस महकमे में हड़कम्प मचा हुआ है। अदालत के आदेशों के उपरांत भी मारपीट करने वाले पति-सास के खिलाफ पुलिस के मुकदमा दर्ज नहीं करने से आहत होकर पीड़ित महिला ने आत्महत्या कर ली।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सिरंगसर गांव में मंजू पत्नी जगदीश ने आत्महत्या कर ली। मंजू का विवाह जगदीश पुत्र मोहनलाल निवासी दुलचासर (महाजन, बीकानेर) के साथ करीबन पांच साल पहले हुआ था। मंजू को कुछ समय पूर्व पति व सास आदि ने मारपीट कर घर से निकाल दिया। इसके बाद वह अपने पिता सरदाराराम निवासी सिरंगसर के पास ही रह रही थी।

मंजू ने पति और ससुराल पक्ष के अन्य लोगों की प्रताड़ना के खिलाफ लड़ने का मानस बनाया और अदालत की शरण ली। अदालत ने उसकी पीड़ा को सुनते हुए हनुमानगढ़ जिले की खुइयां थाना पुलिस को 24 घंटे के भीतर मुकदमा दर्ज कर जांच करने के आदेश दिये।

पुलिस ने अदालत के आदेशों को भी नजरांदाज कर दिया। 10 दिन तक पीड़ित महिला थाना के चक्कर काटती रही। निराश होकर मंजू ने गत दिवस आत्महत्या कर ली। उसके आत्महत्या के बाद पुलिस में हड़कम्प मच गया है।

थाना पुलिस ने उसकी मौत के बाद अदालत से प्राप्त इस्तगासा के आधार पर पहले पति जगदीश व सास आदि के खिलाफ 498ए, 406 के तहत मुकदमा (एफआईआर नंबर 85/19)  दर्ज की। वहीं इसके कुछ समय बाद पति जगदीश के खिलाफ 323, 498 बी (एफआईआर नंबर 86/19) दर्ज की। दूसरे मुकदमे में भी पुलिस चूक गयी। उसने 323 धारा किस आधार पर लगायी, यह भी जांच का विषय बन गया है। वहीं महिला पति से अलग रह रही थी तो आत्महत्या दुष्प्रेरणा का मुकदमा बनता था किंतु पुलिस ने उसको यहां दहेज हत्या मान लिया। इससे आरोपी पक्ष को अदालत से लाभ मिल सकता है।

राजस्थान के ही अलवर जिले में पुलिस की अवैध हिरासत से मुक्त हुई एक महिला ने आत्महत्या कर ली थी और चुरू जिले में एक महिला पूर्व में ही पुलिस पर प्रताड़ना के आरोप लगाकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर चुकी है।

पुलिस ने अब अपनी खाल बचाने के लिए आरोपी पति जगदीश को गिरफ्तार कर दो दिन का रिमांड हासिल कर लिया है। रिमांड अवधि में क्या पुलिस अब उन गालियों को बरामद करना चाहती है जो मंजू जीवित होकर अपने पति की सुन रही थी या उन हाथ को बरामद करना चाहती है जो रोजाना मंजू के शरीर पर नये निशान बना जाते थे।

क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी :

थानाधिकारी का इस मामले में कहना है कि पूर्व में एक हत्या के मामले में पूरा स्टाफ लाइन हाजिर हो गया था। इसके बाद थाने में पूरा स्टाफ नहीं है। स्वीकृति के मुकाबले मात्र 40 प्रतिशत नफरी है। इस कारण मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सका।

वहीं पुलिस अधीक्षक कालूराम रावत से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने कॉल बैक करने का आश्वासन दिया, किंतु देर रात इंतजार के बाद भी उन्होंने फोन कर इस संबंध में जानकारी नहीं दी।

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