सतीश बेरी

कुछ सवालों के उत्तर, जो हमारे लिये जानना शायद आवश्यक भी है!

अनेक बार यह सवाल उठता है कि सद्कर्म के बाद भी मनुष्य के सामने बड़ा संकट क्यों आ जाता है। इसी तरह के सवालों को खोजने के लिए भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीरामचंद्र जी की जीवनी से मिली शिक्षा का सार प्रस्तुत करने के लिए प्रयास किये हैं। वहीं हमने तीन गुरु साहिबान, गुरु अर्जुन देव जी, गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोविदंसिंह जी के प्रेरणास्रोत जीवन से भी प्राप्त शिक्षा को समर्पित करने का प्रयास किया है।

बाबा गुरु नानक देव जी
प्रथम पातशाही श्री गुरुनानक देव जी।

धर्म के ग्रंथों का जब अध्ययन किया जाता है तो यह सामने आता है कि राजा हरीशचंद्र से बहुत बड़े दानवीर और सत्यवादी थे।

ऐसी मान्यता है कि राजा हरीशचंद्र जी ने अपने जन्म में कभी भी झूठ नहीं बोला। कोई अधर्म नहीं किया।  धर्मग्रंथों के अनुसार ही राजा हरीशचंद्र पर एक समय ऐसी विपदा आई कि उनका राजपाट चला गया। वे बेघर हो गये। दूसरे प्रदेश में गये तो वहां भी उन्हें अपनी पत्नी और पुत्र से विमुख होना पड़ा। उनकी पत्नी को एक परिवार में दासी की तरह रखा गया। वहीं राजा हरीशचंद्र भी दास बन गये थे और एक श्मशान भूमि में उन्होंने कार्य किया। 

श्रीरामचंद्र जी मैया सीता, लक्ष्मण व हनुमान जी के साथ।
श्रीरामचंद्र जी का दरबार। भगवान श्रीरामचंद्र जी स्वयं। उनके साथ है सीता मैय्या, अनुज लक्ष्मण जी और भगवान के महान सेवक, महादेवता श्री हनुमान महाप्रभु जी।

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