प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित अन्य नेता
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत कौर, सुखबीरसिंह बादल, अमरेन्द्रसिंह, अशोक गहलोत आदि।

श्रीगगानगर। श्रीगंगानगर जिले में जिस तरह से बेरोजगारी बढ़ रही है, उसी अनुपात में सट्‌टा-क्रिकेट बुक्की और जुआ का धंधा भी बढ़ रहा है। युवा शॉर्टकट में सफलता के लिए गैर कानूनी धंधों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। शॉर्टकट से कमाये गये धन को वे नशे में भी उड़ा रहे हैं। वहीं युवा रोजगार की तलाश में महानगरों अथवा विदेश की ओर भी भाग रहे हैं। यह उस जिले की कहानी है जिसे कभी राजस्थान का सिरमौर कहा जाता था। जिस तरह से सटोरियों-जुआरियों की संख्या बढ़ रही है उससे भविष्य में इसे जुआरियों-सटोरियों के शहर के नाम से भी पुकारा जा सकता है।

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श्रीगंगानगर जिले को राजस्थान का सिरमौर इसलिए कहा जाता था क्योंकि यहां दो बड़ी औद्योगिक इकाइयां जेसीटी मिल और शुगर मिल थी। इसमें हजारों लोगों को परोक्ष रोजगार मिला हुआ था और लाखों लोग अपरोक्ष से जुड़े हुए थे। किसानों के पास बडे-बड़े खेत थे। यह दो दशक पहले तक तस्वीर थी।

आज की तस्वीर यह है कि दोनों औद्योगिक इकाइयां श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर नहीं है। नयी औद्योगिक इकाइयों को स्थापित करने के लिए राज्य, केन्द्र अथवा सांसद, विधायकों ने कोई कार्य नहीं किया।

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किसानों की हालत पर नजर डालते हैं तो सामने आता है कि परिवार बढ़ता चला गया और खेत छोटे होते चले गये। खेती भी अब महंगी हो गयी है तो यह लाभ वाला रोजगार नहीं रही है।

युवा या तो पलायन कर रहे हैं अथवा जुआ-सट्‌टा-नशे के कारोबार की ओर आकर्षित हो रहे हैं। वहीं नोटबंदी के बाद व्यापारी ऐसे फंसे कि बाहर ही नहीं निकल पाये। लोकसभा चुनावों में भी वे सत्ताविरोधी लहर नहीं बना पाये और अब बस सरकार की नीतियों के भरोसे हैं।

इस तरह के हालात कभी भी श्रीगंगानगर के नहीं रहे। वर्तमान परिस्थितियों में कुछ करने की जरूरत है। इस तरह से आशा की किरण एक नजर आती है, बठिण्डा। बठिण्डा शहर इस समय सबसे तेज प्रगति करने वाला शहर है। यहां से सांसद हरसिमरत कौर बादल केन्द्रीय मंत्री हैं। बादल परिवार का गांव इसी जिले के अधीन है। इस कारण यहां विकास का फोक्स है। शहर मैट्रो का रूप धारण करता जा रहा है।

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फिरोजपुर से सांसद सुखबीरसिंह बादल हैं। श्रीगंगानगर से सांसद निहालचंद हैं। यह तीनों ही भाजपाई या उसके सहयोगी हैं। इस तरह से अगर भटिण्डा-फिरोजपुर-श्रीगंगानगर को दिल्ली एनसीआर की तरह का एक विशेष जोन बना दिया जाये तो फिरोजपुर लोकसभा क्षेत्र, जो सीमांत होने का दंश झेल रहा है, वहां भी विकास की नयी गाथा लिखी जा सकती है।

इसी तरह से मैट्रो सिटी बन रहे भटिण्डा के विशाल हवाई अड्डे, एम्स, बड़े मॉल्स, पिकनिक स्पॉट का लाभ स्थानीय जनता को आसानी से मिल जायेगा। इसके लिए आवश्यकता है श्रीगंगानगर-फिरोजपुर-भटिण्डा के बीच मैट्रो जैसी सुविधा की।

अगर यह तीनों शहरों को जोड़ दें तो करोड़ों रुपये इलाके को विकास कार्यों के लिए मिलेंगे। साथ ही तीनों शहरों में व्यापार के लिए ज्यादा बेहतर सम्पर्क हो सकेगा। एक-दूसरे शहर में सामान भेजने की आसानी होगी। बठिण्डा में जनसंख्या का भार भी कम होगा और यह आसपास के शहरों तक सीमित हो जायेगा।

इस कल्पना को साकार किया जा सकता है और श्रीगंगानगर में छायी मंदी की उदासी को दूर किया जा सकता है। फिरोजपुर में भी नया विकास संभव हो सकेगा।

यह सपना इसलिए भी साकार हो सकता है क्योंकि राजस्थान और पंजाब में कांग्रेस की ही सरकार है। दोनों राज्य मिलकर भी इस क्षेत्र में हजारों युवाओं को रोजगार और व्यापारियों को तरक्की का एक बड़ा मौका देकर अपनी राजनीतिक शक्ति को भी मजबूत कर सकती है। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री स्व. शीला दीक्षित ने ही दिल्ली में मैट्रो का सपना देखा था और उसको साकार करते हुए 15 साल तक लगातार राज किया था। यह हकीकत अब दो कांग्रेसी नेता राजस्थान और पंजाब के सीमांत इलाके में भी बना सकते हैं।

क्या कभी 1998 से पहले किसी मुख्यमंत्री ने दिल्ली में मैट्रो के बारे में विचार किया था। उन्होंने दिल्ली को खुशहाल राज्य बनाने के लिए यह कल्पना की और उसको हकीकत बनाया।

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