सावन माह आरंभ होते ही हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित देवी मां चिंतापूर्णी मंदिर में भी भंडारे आरंभ हो जाते हैं। लाखों लोग श्रवण मास में देवी की पूजा के लिए पहुंचते हैं और अपने जयकारों से मां को प्रसन्नत करते हैं। चिंतापूर्णी मां का अर्थ ही चिंता हरण करने वाली देवी दुर्गा का रूप है।

कहां है देवी चिंतापूर्णी का मंदिर
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में देवी दुर्गा का चिंतापूर्णी मंदिर है। यह पंजाब के होशियारपुर से करीबन 50 किमी की दूरी पर है। जालंधर से इसकी दूरी 100 किमी के लगभग है।  दिल को हरा-भरा करने वाले वातावरण के बीचों-बीच मां चिंतापूर्णी का दरबार है। मां के दरबार को छिनमस्तिका के नाम से भी पुकारा जाता है। मां के दरबार की खोज देवी दुर्गा के अनन्य भक्त माईदास ने की थी। पटियाला रियासत में निवास करने वाले भक्त माईदास को देवी दुर्गा ने स्वप्न दिये थे और मंदिर मार्ग के बारे में बताया था। माईदास ने देवी के सरोवर को भी तलाश लिया था। इस सरोवर जल से ही वे मां की पूजा किया करते थे

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51 शक्तिपीठों में से एक है चिंतापूर्णी मंदिर
सनातनकाल का इतिहास के अनुसार चिंतापूर्णी या छिन्नमस्तिका मंदिर मां के 51 शक्तिपीठों में से एक है। पहाड़ों पर निवास करने वाली देवी के 9 मंदिरों में से यह भी एक प्रमुख शक्तिपीठ है। कथाओं के अनुसार देवी सती घटना के बाद शिव तांडव हुआ और इस दौरान मां के चरण इस स्थान पर गिरे थे। यही कारण है कि मंदिर में मां के मंदिर के साथ चरणों के दर्शन एवं उसको स्पर्श करने का भी महात्मय है।

हलवे का प्रसाद
चिंतापूर्णी माता मंदिर में हलवे का ही प्रसाद चढ़ाया जाता है। मंदिर के आसपास अनेक संस्थान है जहां मंदिर में मां को समर्पित करने के लिए हलवे का प्रसाद मिलता है। इसके अतिरिक्त भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार लाल रंग की चुनरी और श्नृंगार का सामान भी वहां से प्राप्त कर पूजा करवाते हैं। यह पूजा शुभ मानी जाती है।

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हर शहर की अपनी धर्मशाला
मां की शक्ति का ही प्रताप है कि मंदिर पहाड़ों के बीचों-बीच है किंतु वहां मंदिर के कारण हजारों लोग रोजाना दर्शन करते हैं। इस कारण अनेक शहरों के भक्तों ने अपने-अपने शहर के नाम से धर्मशालाओं का भी निर्माण किया हुआ है ताकि भक्तों को वहां विश्राम करने तथा रात्रि निवास करने में कोई भी मुश्किल नहीं हो। धर्मशालाओं में गर्म पानी, बिस्तर आदि की व्यवस्था होती है। सर्दियों के दिनों में भी वहां आराम से रहा जा सकता है। अनेक धर्मशाला नो प्रोफिट नो लॉस के आधार पर संचालित की जाती हैं।

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नवरात्रि/सावन पर भंडारे का आयोजन
अनेक भक्त मंडिलयां मां के पूजा के विशेष अवसरों पर देवी मंदिर पर भंडारे का आयोजन करती हैं। सुबह नाश्ता, दोपहर का भोजन, चाय और शाम का भोजन। पूरे दिन सेवा की जाती है। नवरात्रि और सावन ऐसे उत्सव हैं, जब मां दुर्गा की पूजा के लिए हजारों नहीं लाखों लोग आते हैं। वहीं पंजाब के जालंधर, लुधियाना, कपूरथला, अमृतसर, सहित अनेक शहर हैं जहां से हर शनिवार को युवा बाइक्स और कार्स लेकर निकलते हैं और शनिवार रात मां के चरणों के बिताकर रविवार सुबह दर्शन के बाद निकल आते हैं। इससे उनके एक पंथ दो काज हो जाते हैं। वे मां के चरणों में बैठकर स्वयं को समर्पित कर पूजा भी कर लेते हैं और वीक एण्ड का पिकनिक भी बन जाता है।

परिवहन व्यवस्था बहुत ही ज्यादा मजबूत
चिंतापूर्णी माता मंदिर ऐसा स्थान है, जहां से सार्वजनिक परिवहन प्रणाली बहुत ही मजबूत है। मंदिर से 80 किमी की दूरी पर ही पंजाब का प्रमुख शहर जालंधर है। चिंतापूर्णी से जालंधर के लिए दिन में दर्जनों बसें हैं। जालंधर से हर शहर के लिए बस है। इस तरह से सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को कमजोर नहीं कहा जा सकता।

पार्किंग की भी व्यवस्था
नवरात्रि उत्सव के दौरान मंदिर में हर रोज लाखों की भीड़ होती है। हजारों वाहन आते हैं। किसी को भी परेशानी नहीं हो, इस कारण वहां पार्किंग के लिए विशाल स्थान चिन्हित किया गया है। मंदिर से करीबन पांच किमी की दूरी पर ही पार्किंग स्थल बनाया गया है। बीमार, बुजुर्ग अथवा दिव्यांग को वाहन के साथ जाने की भी इजाजत दी जाती है। अनेक होटल भी वहां हैं, इस कारण नवरात्रि/उपवास के भोजन की भी कोई परेशानी नहीं होती। प्याज/लहसुन रहित भोजन भक्तों के लिए उपलब्ध होता है।

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