पूनम अंकुर छाबड़ा
पूनम अंकुर छाबड़ा। फाइल फोटो

जयपुर। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं के लिए लम्बे समय तक संघर्ष करने वाले पूर्व विधायक गुरुशरण छाबड़ा ने प्रदेश में शराब बंदी जैसे पवित्र उद्देश्य के लिए आमरण अनशन आरंभ किया और आखिर में लाखों परिवारों के लिए संघर्ष करते हुए शहीद हो गये।

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पूर्व विधायक गुरुशरण छाबड़ा लम्बे समय तक शराब बंदी की मांग को लेकर संघर्षरत रहे थे। अपनी मांग पूरी नहीं होने पर भाजपा सरकार के समय जल भी त्याग दिया। तत्कालीन सरकार ने उनके अनशन को गंभीरता से नहीं लिया, जिस कारण उन्होंने अनशन करते हुए जनता हित में प्राण त्याग दिये।

अब अशोक गहलोत सरकार सत्ता में आये हैं तो उन्होंने अपने पहले ही बजट में सूरतगढ़ के राजकीय महाविद्यालय का नाम गुरुशरण छाबड़ा के नाम पर करने का एलान किया है।

श्री गहलोत गांधीवादी विचारधारा में यकीन करते हैं और उन्होंने ही प्रदेश में रात 8 बजे तक ठेकों पर शराब बिक्री का बड़ा कदम उठाया था। यह कदम भी उन्होंने गुरुशरण छाबड़ा के आंदोलन को देखते हुए लिया था।

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राजस्थान विधानसभा में बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, शराब बंदी जैसे पवित्र आंदोलन के लिए प्राण देने वाले गुरुशरण छाबड़ा जी के नाम पर सूरतगढ़ के राजकीय महाविद्यालय के नामकरण का प्रस्ताव करता हूं। यह बड़ी घोषणा है और विधानसभा में बजट पारित होते ही सूरतगढ़ के महाविद्यालय का नाम पूर्व विधायक श्री छाबड़ा के नाम पर हो जायेगा।

शराब बंदी आंदोलन के जनक गुरुशरण छाबड़ा के अभियान को पूरा करने में जुटीं उनकी पुत्रवधू पूनम अंकुर छाबड़ा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने एक वक्तव्य में कहा है कि सरकार ने उनके आंदोलन के महत्व को समझा है और इसके लिए वे उनकी आभारी हैं।