Thursday, February 2, 2023
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महात्मा गांधी मेडिकल मार्केट विवाद : भूमि के समर्पणनामा में भी फर्जीवाड़ा

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर रियल इस्टेट के बाजार ही नहीं अपितु, व्यापारी व आमजन में एक मार्केट चर्चा का विषय बनी हुई है। इस मार्केट के हर पन्ने पर भ्रष्टाचार का खुलासा होता जा रहा है।

श्रीगंगानगर (टीएसएन)। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर रियल इस्टेट के बाजार ही नहीं अपितु, व्यापारी व आमजन में एक मार्केट चर्चा का विषय बनी हुई है। इस मार्केट के हर पन्ने पर भ्रष्टाचार का खुलासा होता जा रहा है।

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जस्सासिंह मार्ग पर चक 1 ए छोटी के मुरब्बा नंबर 62 के पांच बीघा भूमि की तारबंदी करते हुए वहां पर महात्मा गांधी मेडिकल मार्केट के बोर्ड लगा दिये गये हैं। हालांकि इस मार्केट के 80 से ज्यादा लोगों को पट्टे जारी हो चुके हैं। किसी दुकान का निर्माण नहीं हुआ। कुछ खातेदारों ने आपस में बैठकर ही यह तय कर लिया कि किस खातेदार को कितनी दुकान दी जानी है और उसी अनुसार नगर विकास न्यास से पट्टे भी जारी करवा दिये गये।

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सड़कों, नालियों आदि का निर्माण नहीं हुआ है और यह प्रचार किया जा रहा है कि दुकानों की बिक्री की जा रही है, जबकि 1990 के समय के अनेक लोग स्टाम्प लेकर घूम रहे हैं और कह रहे हैं कि उनको दुकानें बेच दी गयी थीं। दुकान बेचने वाले श्रवण मल्होत्रा और विजय कुमार थे।
अब इसी मार्केट को लेकर नया दस्तावेज सामने आया है। चाय व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र गर्ग काका और पवन कुमार नामक दो व्यक्तियों का एक हल्फनामा सामने आया है, जिसमें वे बता रहे हैं कि उनकी चक 1 ए छोटी के मुरब्बा नंबर 58/62 में भूमि है। इस हल्फनामा में बताया गया है कि उनकी किला नंबर 3, 8, 13, 18, 23, 4, 7, 14, 17, 24 में 0.629 हैक्टेयर भूमि है। किला नंबर के किस दिशा में भूमि है। किस किला में कितनी भूमि है, इसका उल्लेख नहीं है।

यह हल्फनामा के प्रथम पेज पर इन्द्राज है और इसमें सुरेन्द्र गर्ग काका और पवन कुमार के हस्ताक्षर भी हैं। इसको एडवोकेट सतीश कुमार गुप्ता ने नोटेरी की मुहर लगाकर प्रमाणित किया है। अब इसी हल्फनामा के पेज नंबर दो देखा जाये तो वहां पर इसी भूमि को 0.695 हैक्टेयर बताया गया है। राजस्थान भू राजस्व अधिनियम की धारा 1956 की धारा 90बी की कार्यवाही के लिए समर्पित करने के लिए यह शपथ पत्र दिया गया है।

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नगर विकास न्यास के तत्कालीन अधिकारियों ने भी इस शपथ पत्र को स्वीकार कर लिया। प्रथम पेज पर भूमि 0.629 हैक्टेयर है और दूसरे पेज पर वही भूमि 0.695 हैक्टेयर हो जाती है। त्रुटिपूर्ण शपथ पत्र में किस तथ्य को सही माना जाये, इस पर दिमाग लगाने की किसी भी अधिकारी ने हिम्मत नहीं दिखायी। सम्पर्ण पत्र को स्वीकार कर लिया गया। यह सम्र्पण पत्र 20 अक्टूबर 2005 को दिया गया था। प्रथम पेज को प्रमाणित किया गया है ओर दूसरे पेज को नोटेरी से प्रमाणित भी नहीं किया गया है।

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