दिल्ली उच्च न्यायालय

फरीदाबाद 17 जुलाई, ईएसआईसी की उप निदेशक रेवेन्यू पर दिल्ली हाई कोर्ट ने यौन उत्पीड़न की झूठी शिकायत देने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साल 2015 में उप निदेशक ने आंतरिक शिकायत समिति की जांच को चुनौती देते हुए कोर्ट में मामला दायर किया था। सूत्रों के मुताबिक, साल 2011 में याचिकाकर्ता गुड़गांव के मानेसर ईएसआईसी ऑफिस में सहायक निदेशक थी। उन्होंने ईएसआईसी के महानिदेशक को भेजी लिखित शिकायत में एक अन्य सहायक निदेशक पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

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आंतरिक शिकायत समिति ने महिला के आरोपों को गलत ठहराया
मामले की जांच के लिए आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का गठन किया गया। समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि शिकायतकर्ता का आरोप गलत है। उसके बाद याचिकाकर्ता और प्रतिवादी दोनों को अपनी वर्तमान पोस्टिंग से स्थानांतरित करने की बात कही। इस पर याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि समिति की रिपोर्ट अनुचित है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रतिवादी ने भी शिकायत वापस लेने के लिए दबाव डाला था।

दिल्ली हाई कोर्ट में महिला ने की थी अपील
फरवरी 2015 में प्रतिवादी सेवानिवृत्त हो गए। इसलिए महिला याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी के सेवानिवृत्ति लाभों को वापस लेने के लिए नियोक्ता ईएसआईसी को निर्देश देने की मांग की। उसके बाद याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाई कोर्ट में आंतरिक शिकायत समिति की रिपोर्ट को गलत ठहराते हुए अपील की थी।

हाई कोर्ट ने महिला पर लगाया जुर्माना
दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस जे.आर. मिड्डा की पीठ ने ईएसआईसी को मामले में मूल प्रासंगिक रेकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए। न्यायालय ने कहा कि समिति के समक्ष, याचिकाकर्ता उस दिन उपस्थित स्टाफ के सदस्यों से संबंधित कागजात दिखाए जाने के बावजूद घटना के समय कथित रूप से उपस्थित किसी भी व्यक्ति के नाम को याद नहीं कर सकी। सभी रिपोर्टों की जांच के बाद न्यायालय ने कहा कि यौन उत्पीड़न की शिकायत झूठी पाई गई। न्यायालय ने 9 जुलाई 50,000 रुपये याचिकाकर्ता द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय अधिवक्ता कल्याण ट्रस्ट के पास जमा कराने का फैसला सुनाया और याचिका को भी खारिज कर दिया। इसके अलावा न्यायालय ने नियोक्ता ईएसआईसी को भी प्रतिवादी के खिलाफ झूठी यौन उत्पीड़न शिकायत दर्ज करने के लिए उसके खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दी।

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