स्टीव जॉब्स
एप्पल के संस्थाप स्टीव जॉब्स। फाइल फोटो

स्मार्टफोन और कम्प्यूटर निर्माण की अग्रणी कंपनी एप्पल इंक के संस्थापक स्टीव जॉब्स का भारत से पुराना कनेक्‌शन रहा है। यह खुलासा मार्क जुकरबर्ग ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ 2015 में किया था।

प्रधानमंत्री बनने के उपरांत श्री मोदी अमेरिकी प्रवास पर थे और उन्होंने फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से भी मुलाकात की थी। उस दौरान उन्होंने खुलासा किया था कि उन्होंने फेसबुक के बुरे समय में स्टीव जॉब्स से मुलाकात की थी और जॉब्स ने उन्हें भारत के एक मंदिर के बारे में बताया था।

स्टीव जॉब्स का भारत से संबंध के बारे में पड़ताल आरंभ हुई। उस समय गूगल पर सर्च किये जाने वाला सबसे ज्यादा लोकप्रिय शब्द स्टीव जॉब्स ही था।

स्टीव जॉब्स की भारत यात्रा से ही एप्पल का नाम सेब पर रखे जाने का भी खुलासा हुआ था।

दरअसल 70 के दशक में स्टीव जॉब्स कंपनी की स्थापना करना चाहते थे और उस समय उन्हें किसी ने भारत के अध्यात्मिक नगरी उत्तराखण्ड तत्कालीन उत्तरप्रदेश का पार्ट, की यात्रा करने की सलाह दी थी। भारत यात्रा के दौरान ही वे नैनीताल में नीम करौली बाबा के आश्रम में भी गये थे।

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नीम करौली के बारे में उन्होंने काफी सुना था और वहां पहुंचकर उन्होंने अध्यात्म का अनुभव किया। जॉब्स ने काफी दिनों तक उत्तराखण्ड में रहते हुए कई आश्रम में प्रवास किया और भारत यात्रा के दौरान उन्होंने सेब खाकर ही गुजारा किया। सेब खाते-खाते ही उन्होंने बौद्ध धर्म को स्वीकार किया।

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वे जब वापिस अमेरिका गये थे तो उन्होंने मुंडन करवाया था और अपनी कंपनी का नाम भी उन्होंने सेब के स्थान पर एप्पल रख दिया। यह एप्पल आज दुनिया का सबसे लोकप्रिय नाम है।

ध्यान रखने योग्य यह भी है कि जब वे दिल्ली पहुंचे थे और जिस होटल में उन्होंने अपना ठिकाना बनाया था, वहां के मैनेजर ने उनको वायदे के मुताबिक फिल्टर पानी नहीं दिया था जिस कारण उनका स्वास्थ्य भी खराब हो गया था।

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मार्क जुकरबर्ग ने भारत यात्रा के बारे में तो खुलासा किया था किंतु यह आज तक नहीं बताया कि वे किस मंदिर में गये थे। माना यही जा रहा है कि वे नीम करौली बाबा के आश्रम में गये थे। हालांकि इसकी आधरिक पुष्टि आज तक फेसबुक या जुकरबर्ग के कार्यालय ने नहीं की है। यह भी सच है कि 70 के दशक में ही बाबा नीम करोली का निधन हो गया था।