राजस्थान में अधिवक्ता ने फांसी लगायी, एसएचओ सहित अनेक पर मुकदमा

राजस्थान में अधिवक्ता प्रशासन-शासन से पीडि़त होकर आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं। यह संगठन की कमजोरी भी हो सकती है। तीन माह पूर्व सीकर के खंडेला क्षेत्र में एक अधिवक्ता हंसराज ने कोर्ट परिसर में ही स्वयं को आग लगा ली थी। उसने आरोप लगाया था कि एसडीएम राकेश कुमार और एसएचओ घासीराम मीणा उनको प्रताडि़त कर रहे हैं।

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  • पुलिस-प्रशासन से पीडि़त तीन माह में दो वकीलों ने की आत्महत्या
  • नशे के खिलाफ अभियान चलाने पर किया गया था प्रताडि़त

श्रीगंगानगर/घड़साना (द सांध्यदीप न्यूज)। लोकतंत्र के प्रहरी के रूप में पहचान रखने वाले अधिवक्ता-मीडिया जब शासन-प्रशासन से प्रताडि़त नजर आये तो उस स्थिति में एक मजबूत व्यवस्था कैसे परिभाषित की जा सकती है? राजस्थान के घड़साना में पुलिस से पीडि़त एक अधिवक्ता ने आत्महत्या कर ली। करीबन तीन माह पहले सीकर के खंडेला में भी एक वरिष्ठ वकील ने कोर्ट परिसर में स्वयं को आग लगा ली थी। उनकी मौत के उपरांत भी व्यवस्था में सुधार नजर नहीं आया।

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घड़साना में सोमवार सुबह एक हड़कम्प मचा देने वाला समाचार सामने आया। अधिवक्ता विजय रेवाड़ क घर में सूर्य उदय के समय ही भूकम्प आ गया था। अधिवक्ता रेवाड़ फांसी के फंदे पर झूलते हुए नजर आये। उनको तुरंत नीचे उतारा गया किंतु तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। मौके पर पुलिस भी पहुंची। किंतु परिवारजनों ने शव संबंधित एजेंसी के सुपुर्द करने से इन्कार कर दिया।

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पूर्व विधायक पवन दुग्गल, शिमला बावरी, मौजूदा विधायक संतोष बावरी, व्यापार संघ, सामाजिक-धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी श्री रेवाड़ के घर पर एकत्रित होने लगे। घड़साना पुलिस थाना में धरना लगा दिया गया। भारी संख्या में लोगों के एकत्रित होने तथा बाजार बंद होने की खबर मिलने पर भारी संख्या में अतिरिक्त जाब्ता भी घड़साना भेज दिया गया। रायसिंहनगर सैक्टर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बनवारीलाल मीणा, अनूपगढ़ के डीवाईएसपी जयदेव सिहाग आदि ने अनेक थानाधिकारियों के साथ घड़साना में ही कैम्प कर लिया।

 

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अधिवक्ता विजय रेवाड़ के आत्महत्या के खबर मिलने पर जिले भर के बार संघ सदस्यों में भी शोक की लहर दौड़ गयी। राजस्थान बार कौंसिल की भी आपात बैठक आयोजित की गयी और इस प्रकरण की जांच बीकानेर रेंज के बाहर के किसी आईपीएस स्तर के अधिकारी से करवाने, पीडि़त परिवार को उचित मुआवजा, सरकारी नौकरी दिये जाने की मांग का समर्थन किया गया। बार कौंसिल ने मंगलवार को प्रदेश भर में रोष प्रदर्शन का भी निर्णय लिया।

शाम होने से पूर्व ही थानाधिकारी मदनलाल बिश्रोई, एसआई कल्पना, एसएचओ के रीडर बंशीलाल, एएसआई कमल मीणा आदि को नामजद करते हुए आत्महत्या दुष्प्रेरणा के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया। यह मुकदमा अधिवक्ता की पत्नी कांता रानी की रिपोर्ट पर दर्ज किया गया है। मुस्तगिस का आरोप है कि विजय रेवाड़ क्षेत्र में फैल रहे नशे के खिलाफ 31 मार्च 2022 से लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। इससे नशे के कारोबारियों पर नकेल कस गयी।

पुलिस ने नशे के कारोबारियों का पक्ष लेते हुए 18 अप्रेल की रात को उसके पति को उनके समर्थकों के साथ गिरफ्तार कर लिया और पूरी रात टार्चर किया गया। उनके पति के खिलाफ पुलिस ने झूठा मुकदमा भी दर्ज किया। वहीं उनके पति ने अदालत की शरण ली जिसके आधार पर थानाधिकारी मदनलाल बिश्रोई सहित अनेक पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर तो हुई किंतु मुकदमे में आरोपितों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई।

उनके पति लगातार पुलिस अधिकारियों व अन्य स्तर पर पत्र व्यवहार करते रहे किंतु सुनवाई नहीं होने और पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों की प्रताडऩा से दुखी होकर विजय रेवाड़ ने सोमवार सुबह आत्महत्या कर ली।

एडीशनल एसपी गंगानगर कर रहे हैं जांच

अधिवक्ता विजय रेवाड़ ने अपने साथ पुलिस हवालात में प्रताडऩा के आरोप में एफआईआर नंबर 157 दर्ज करवायी गयी थी। इस मामले की जांच पूर्व में अनूपगढ़ सीओ जयदेव सिहाग कर रहे थे किंतु उच्चाधिकारियों ने अपने कार्मिकों का बचाव करने के लिए जांच पत्रावली को गंगानगर तलब कर एडीशनल एसपी हैडक्वार्टर को आईओ नियुक्त कर दिया।

चार माह गुजर जाने के उपरांत भी अभी तक आरोपितों के खिलाफ कार्यवाही हुई हो, ऐसी जानकारी सामने नहीं आयी है। बार कौंसिल के सदस्य, वरिष्ठ अधिवक्ता नवरंग चौधरी बताते हैं कि एफआईआर पर कार्यवाही नहीं होना चिंता का विषय है। सोमवार को कौंसिल की बैठक में इस पर चर्चा भी की गयी और अनेक प्रस्ताव पारित किये गये।

श्रीगंगानगर एडीशनल एसपी का पद कई माह से रिक्त

सरकार कानून व्यवस्था के प्रति कितनी संजीदा है, इसका प्रमाण इस बात से भी मिल जाता है कि श्रीगंगानगर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) का पद अनेक माह से खाली है। सरकार आरपीएस और अन्य अधिकारियों की तबादला सूची जारी कर चुकी है किंतु राजनीतिक कारणों से इस पद पर नियुक्ति ही नहीं की गयी और इस रिक्त पद की जिम्मेदारी महिला अपराध से संबंधित विशेष एडीशनल एसपी को सौंपी हुई है। वे अपने पद के साथ-साथ एडीशनल एसपी का भी कार्य देख रहे हैं।

तीन माह में दूसरी बड़ी घटना

राजस्थान में अधिवक्ता प्रशासन-शासन से पीडि़त होकर आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं। यह संगठन की कमजोरी भी हो सकती है। तीन माह पूर्व सीकर के खंडेला क्षेत्र में एक अधिवक्ता हंसराज ने कोर्ट परिसर में ही स्वयं को आग लगा ली थी। उसने आरोप लगाया था कि एसडीएम राकेश कुमार और एसएचओ घासीराम मीणा उनको प्रताडि़त कर रहे हैं।

अधिवक्ता को जयपुर में भी ले जाया गया और एसएमएस अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी थी। उनकी मौत की घटना यह संकेत था कि सत्ताधारी दल के नेता और सिस्टम में मौजूद पदाधिकारी जिस तरह का दावा करते हैं, सिस्टम उस तरीके से नहीं चल रहा है। इस घटना के उपरांत घड़साना में एक वरिष्ठ अधिवक्ता पुलिस अधिकारियों की प्रताडऩा से दुखी होकर आत्महत्या कर लेता है।

वह जनसेवा में अपनी भागीदारी निभा रहे थे किंतु नशे के खिलाफ उनका अभियान पुलिस को अच्छा नहीं लग रहा था।

घड़साना कल पूरी तरह से बंद

घड़साना में व्यापारिक और शैक्षणिक संस्थाओं ने स्वत: ही मंगलवार को बंद का आह्वन किया है। हालांकि क्षेत्र से मिल रही रिपोर्ट में अनिश्चितकालीन बंद का आह्वान का खबर होना बताया गया है। देर रात को भी अधिवक्ता विजय रेवाड़ के घर के बाहर सैकड़ों लोग धरने में शामिल थे। मंगलवार को घड़साना पुलिस थाना का घेराव का एलान किया गया है। डीवाईएसपी जयदेव सिहाग ने बताया कि देर रात तक किसी कार्मिक का तबादला किया गया हो, ऐसी जानकारी उनके पास नहीं आयी है।

VIASatish Beri
SOURCESandhyadeep Team
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