राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को विधानसभा में ऑनर किलिंग की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए एक स्पैशल एक्ट बनाने का भी एलान कर दिया। उनकी यह घोषणा निसंदेह काबिले तारीफ है। इससे ऑनर किलिंग की घटनाओं पर अंकुश लग सकता है।

राज्य में पिछले कुछ समय के दौरान अनेक बड़ी घटनाएं हुई हैं, जो समाज को झकझोर गयी हैं। कभी पाश्चात्य संस्कृति का हिस्सा रहा प्रेम विवाह ने भारत में महानगरों में प्रवेश किया। आज यह संस्कृति हिन्दुस्तान के हर गली-मोहल्ले में पहुंच चुकी है।

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राजस्थान में शिक्षा का स्तर कई गुणा बढ़ जाने के बावजूद भी लोग प्रेम विवाह को स्वीकार करने की मानसिकता को सृजित नहीं कर पाये हैं। प्रेम विवाह को आज भी परिवार की मान-मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाला कदम माना जाता है।

हालांकि यह भी सच है कि प्रेम विवाह करने वाले भी तलाक तक पहुंचते हैं, इनका प्रतिशत भी कम नहीं है। इस तरह के सही-सही आकड़ें तो सामने नहीं आये हैं। अनेक समाजसेवी भी मानते हैं कि अपरिपक्वता की आयु में लोग आकर्षण को प्यार समझ बैठते हैं। आकर्षण समाप्त होते ही तकरार चालू हो जाती है और अनेक बार यह तकरार तलाक तक भी पहुंच जाती है। इस कारण यह कहा जाना कि प्रेम विवाह सुखी गृहस्थ की नींव है तो यह भी गलत साबित हो रहा है।

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अशोक गहलोत ने ऑनर किलिंग को गंभीर माना है, यह उनकी संवेदनशीलता का परिचय है। वैसे तो हत्या के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मौत की सजा तक का प्रावधान है। इससे अधिक शारीरिक रूप से सजा नहीं दी जा सकती। सरकार नये एक्ट में विशेष जांच अधिकारी और विशेष कार्यबाल तथा विशेष अदालतों के गठन का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। जांच के कार्य को और अधिक पारदर्शी बनाया जा सकता है। विशेष अदालत मामलों की जल्द सुनवाई का कार्य पूर्ण कर कड़ी सजा देकर ऑनर किलिंग समर्थकों तक संदेश पहुंचा सकती है कि अब कड़ा कानून उनके लिए खतरनाक हो सकता है। भारी जुर्माना भी इस तरह की मानसिकता रखने वालों की कमर तोड़ सकता है।

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