वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहली बार अमेरिका की सरकारी यात्रा पर आ रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ आतंकवाद सहित कई मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

डोनाल्ड ट्रम्प ने पाक प्रधानमंत्री को अफगानिस्तान में चल रही तालिबान-अमेरिका की वार्ता को किसी मंजिल तक पहुंचाने में मदद के लिए भी बुलाया हो सकता है।

श्री ट्रम्प ने अफगानिस्तान से अपनी सेना को वापिस बुलाने के लिए घोषणा की हुई है। आगामी एक साल के भीतर अमेरिका में नये राष्ट्रपति का चुनाव भी होना है। इस बीच वे चाहते हैं कि

पहली बार अमेरिका यात्रा पर जायेंगे इमरान खान
तालिबान के साथ चल रही वार्ता में सहयोग चाहता है अमेरिका
राष्ट्रपति चुनावों से पहले अमेरिका सेना की वापसी सुनिश्चित करने का प्रयास

 

राजनीतिक गतिविधयों में पूरी तरह सक्रिय होने से पहले अफगानिस्तान से सेना की वापसी सुनिश्चित कर लें, जो एक दशक से भी अधिक समय से वहां है।

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11 सितंबर 2001 को वर्ल्ड ट्रेड टावर पर हुए हमले के बाद अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता को नेस्तनाबूद करने के लिए अमेरिका ने तालिबान में अपनी सेना को भेजा था। अब वही अमेरिका अफगानिस्तान के साथ वार्ता करने का इच्छुक ही नहीं बल्कि उसके साथ कई दौर की वार्ता भी कर चुका है। राष्ट्रपति ने अपना विशेष दूत भी नियुक्त किया हुआ है।

हैरानीजनक बात यह भी है कि उस समय भी अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी की सत्ता थी और आज भी उसी पार्टी की सत्ता है। तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज विलियम बुश ने अपने सहयोगी देशों के संगठन नाटो के साथ हमला किया था। 18 सालों से वहां तीन बार सत्ता परिवर्तन हो चुका है। किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने तालिबान के साथ चर्चा के लिए इतनी व्याकुलता नहीं दिखायी थी, जितनी डोनाल्ड ट्रम्प दिखा रहे हैं।

सीरिया और अफगानिस्तान के मुद्दों पर मतभेद के कारण रक्षामंत्री जेम्स मैटिस इस्तीफा भी दे चुके हैं।

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राष्ट्रपति चुनावों से पहले अफगानिस्तान से अपनी सेना की वापसी कर वे इसे चुनावी मुद्दा बनाना चाहते हैं। वे दिखाना चाहते हैं कि उन्होंने अमरिकी सेना को वापिस बुलाकर अमेरिकियों की आय से प्राप्त होने वाली आय को रोजगार में लगाने के लिए प्रयास किये हैं न कि दूसरे देशों में जाकर युद्ध करने के लिए।

सच यह भी है कि अमेरिका और तालिबान के बीच आज भी युद्ध जारी है। आशंका यह भी है कि सीरिया से बचे हुए आईएस के आतंकवादी अमेरिकी सेना की वापसी के बाद तालिबान में शरण ले लें। अफगानिस्तान में स्थिति अभी तक नियंत्रण में नहीं है।

इन सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ही राष्ट्रपति ने इमरान खान को अमेरिका यात्रा का प्रस्ताव भेजा था और 22 जुलाई को दोनों देशों के शिखर नेता विचार-विमर्श करेंगे।

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने बताया कि राष्ट्रपति श्री ट्रम्प की पाक प्रधानमंत्री के साथ आतंकवाद सहित कई अन्य मुद्दों पर वार्ता होगी।